राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग में मनाया गया आपदा जोखिम न्यूनीकरण अंतर्राष्ट्रीय दिवस
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई,राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग परिसर जवाड़ी में आज आपदा जोखिम न्यूनीकरण अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक दिवसीय शिविर एवं जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माय भारत-रुद्रप्रयाग के उपनिदेशक राहुल डबराल ने स्वयंसेवियों को दिवस की महत्ता से अवगत कराते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारी और सजगता पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर माय भारत क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया,जिसमें एनएसएस स्वयंसेवियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।एनएसएस नोडल अधिकारी श्रीकांत नौटियाल ने स्वयंसेवियों को जानकारी ही बचाव का संदेश देते हुए आपदा की स्थिति में पूर्व तैयारी और प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की सहसंयोजक अंविता सिंह एवं डॉ.आशीष नौटियाल ने स्वच्छता को आपदा जोखिम न्यूनीकरण का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया और स्वयंसेवियों को समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया
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राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग में मनाया गया आपदा जोखिम न्यूनीकरण अंतर्राष्ट्रीय दिवस
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई,राजकीय महाविद्यालय रुद्रप्रयाग परिसर जवाड़ी में आज आपदा जोखिम न्यूनीकरण अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक दिवसीय शिविर एवं जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माय भारत-रुद्रप्रयाग के उपनिदेशक राहुल डबराल ने स्वयंसेवियों को दिवस की महत्ता से अवगत कराते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारी और सजगता पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर माय भारत क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया,जिसमें एनएसएस स्वयंसेवियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।एनएसएस नोडल अधिकारी श्रीकांत नौटियाल ने स्वयंसेवियों को जानकारी ही बचाव का संदेश देते हुए आपदा की स्थिति में पूर्व तैयारी और प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम की सहसंयोजक अंविता सिंह एवं डॉ.आशीष नौटियाल ने स्वच्छता को आपदा जोखिम न्यूनीकरण का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन से जुड़ी जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया और स्वयंसेवियों को समाज में जागरूकता फैलाने का आग्रह किया