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बैकुंठ चतुर्दशी मेला 2025: श्रीनगर में संस्कृति अध्यात्म और लोककला का अद्भुत संगम मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ

प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की सांस्कृतिक राजधानी श्रीनगर एक बार फिर आस्था,अध्यात्म और संस्कृति के रंगों में रगंने को तैयार है। नगर के ऐतिहासिक आवास विकास मैदान में 4 नवंबर से 13 नवंबर तक विश्वविख्यात बैकुंठ चतुर्दशी मेला इस वर्ष भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा।नगर निगम सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में महापौर आरती भंडारी,उपजिलाधिकारी एवं नगर आयुक्त नूपुर वर्मा तथा नगर उप आयुक्त रविराज बंगारी ने बताया कि इस बार मेले को नई ऊर्जा और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। मेले का शुभारंभ 4 नवंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी करेंगे,जबकि 5 नवंबर को मेले के संरक्षक एवं श्रीनगर विधायक तथा कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।बैकुंठ चतुर्दशी मेला श्रीनगर की पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु इस मेले में भाग लेने पहुंचते हैं। नगर के प्रमुख मंदिर-कमलेश्वर महादेव,नागेश्वर महादेव,कटकेश्वर महादेव,गणेश मंदिर और कंसमरदनी-को दीपमालाओं से सजाया जाएगा,जिससे पूरा नगर दिव्य प्रकाश से आलोकित होगा।नगर निगम ने इस वर्ष मेले को आधुनिकता और परंपरा के संगम के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई है। गोला बाजार में पहाड़ी परिधान पर आधारित फैशन शो,स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां,कृष्ण लीला,लोकनृत्य,गणेश वंदना और मैजिक शो जैसे कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।पहली बार मेले में केबीसी शैली का इंटरैक्टिव शो,कवि सम्मेलन,जागृति कार्यक्रम और संत निरंकारी मिशन द्वारा संत समागम भी होगा।इसके साथ श्रीनगर के सितारे कार्यक्रम प्रसिद्ध लोकगायक अमित सागर के निर्देशन में आयोजित किया जाएगा,जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाएगा। गढ़वाल की लोकसंस्कृति को जीवंत करने हेतु प्रसिद्ध जागर सम्राट हेमा करासी भी अपनी प्रस्तुति देंगे।मेला परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जाएगा। नगर निगम ने यह भी घोषणा की है कि सबसे सुंदर ढंग से सजी दुकानों को विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। महापौर आरती भंडारी ने कहा कि यह मेला लोकसंस्कृति,अध्यात्म और सामुदायिक एकता का प्रतीक है।नगर निगम की पूरी टीम इसे भव्य,सुरक्षित और यादगार बनाने में जुटी है।श्रीनगर का यह बैकुंठ चतुर्दशी मेला केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं,बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है।दीपों से सजा नगर,मंदिरों से उठती आरती की ध्वनि और अलकनंदा तट की शीतल लहरों के बीच यह मेला श्रद्धा,सौहार्द और उल्लास का ऐसा वातावरण रचता है,जो हर आगंतुक के मन में देवभूमि की पावन छवि अंकित कर देता है।

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