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राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में विकास यात्रा पर हुआ विशिष्ट विचार-विमर्श

प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्षगांठ के अवसर पर विकास का पर्व: लोक पर्व के रूप में विषय पर एक विशिष्ट विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्रों,शोधार्थियों एवं शिक्षकों ने राज्य की 25 वर्षों की आर्थिक,सामाजिक एवं संरचनात्मक प्रगति का गहन विश्लेषण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो.एस.पी.सती ने कहा कि राज्य गठन के बाद उत्तराखण्ड ने बुनियादी ढांचे-सड़क,बिजली,स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। उन्होंने कहा पर्वतीय जनपदों में आज भी जीवन की कठिनाइयां बनी हुई हैं। यदि सतत विकास के पथ पर आगे बढ़ना है तो हमें तकनीकी,मानव एवं प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित व समन्वित उपयोग सुनिश्चित करना होगा। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ.अरुण कुकसाल ने इस अवसर पर कहा कि विकास केवल आर्थिक आंकड़ों का विषय नहीं,बल्कि मानव-केंद्रित दृष्टिकोण की मांग करता है। जब तक गांवों का सामाजिक उत्थान और युवाओं की सहभागिता नहीं होगी,तब तक विकास अधूरा रहेगा। विभाग के उपाचार्य डॉ.राय ने राज्य की आर्थिक उपलब्धियों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वर्ष 2001 में मात्र 14.5 हजार करोड़ थी,जो 2024–25 में बढ़कर 3.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस वृद्धि के बावजूद पर्वतीय जिलों का योगदान राज्य के एसडीसी (State Domestic Contribution) में अभी भी नगण्य है। प्रो.शर्मा ने कहा विकास का केंद्रीकरण शहरी और मैदानी क्षेत्रों में ही सीमित रहा है। यदि हमें सच्चे अर्थों में संतुलित विकास चाहिए,तो भूमि सुधार,वन कानून में संशोधन,खनन नीति और छोटे उद्योगों (MSME) के पुनर्गठन पर ठोस कदम उठाने होंगे। डॉ.पाण्डे ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड में ऊर्जा क्षेत्र में विविधीकरण की अपार संभावनाएं हैं। हाइड्रोपावर,सोलर और विंड ऊर्जा के माध्यम से न केवल राज्य आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि युवाओं को व्यापक रोजगार अवसर देकर पलायन की चुनौती को भी कम किया जा सकता है। वहीं डॉ.पांडे ने राज्य की विशेष भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि मिलिट्री आधारित स्टार्टअप,फल,पुष्प माला एवं हर्बल उत्पादन जैसे क्षेत्र राज्य के युवाओं के लिए सुनहरे अवसर लेकर आ सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ.रमेश चन्द्र जोशी ने कुशलता से किया। उन्होंने कहा कि यह विचार-विमर्श सत्र केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं,बल्कि राज्य के विकास चिंतन की एक सामूहिक पहल है। इस अवसर पर छात्रों और शोधार्थियों के बीच 25 वर्षों की विकास यात्रा विषय पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में जोशी ने प्रथम,ऋतु शर्मा ने द्वितीय और श्रेया पुरोहित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम में विभाग के सभी शिक्षकगण,शोध छात्र और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। विचार-विमर्श का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि उत्तराखण्ड का सच्चा विकास तभी संभव है जब आर्थिक प्रगति के साथ-साथ लोक संस्कृति,पर्यावरण संरक्षण और मानव संवेदनशीलता को समान रूप से स्थान दिया जाए।

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