बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या में रोहित चौहान कल्पना चौहान और अमित सागर ने बांधा समां
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या पूरी तरह गीत-संगीत के रंगों में रंगी रही। प्रसिद्ध लोक गायक रोहित चौहान,कल्पना चौहान और अमित सागर की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत युवा गायक रोहित चौहान ने गणेश,गंगा और शिव आरती से की।उनकी भक्ति से भरी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को श्रद्धा और संगीत की भावनाओं से भर दिया।उन्होंने अपने लोकप्रिय गढ़वाली गीत ‘पहाड़ छुटी गे मांजी का आंसू देखी मेरू दिल टूटी गे’,‘मेरी पितरों की बसाई टीरी पाणी जुगता ह्वे’ समेत कई गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शकों की फरमाइश पर उन्होंने ‘गोरी मुखुड़ी सजीली नाक मां की नथुली’ और ‘मेरी भनुली जांई च ब्यूटी पार्लर मां की’ जैसे गीत भी सुनाए,जिन पर श्रोता झूम उठे। लोक गायिका कल्पना चौहान ने अपने मधुर स्वर में ‘बदरीनाथ दैणु ह्वेगेई मि मंता लेकी अंयू छूं’ भजन से प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने ‘मन भरमेगी मेरू तेरी बांसुरी सूणी’, ‘मुंड मां लटुलों कू डिलू बण्यूं च’ और ‘जै बदरी केदारनाथ गंगोत्री जय जय’ जैसे गीतों से वातावरण को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया।लोक गायक अमित सागर ने अपने ऊर्जावान अंदाज़ में ‘चेत की चेत्वाली’, ‘महादेवा’ और ‘बाघ का डेरा’ जैसे गीतों पर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। देर रात तक पंडाल में तालियों की गूंज और गीतों की मिठास बनी रही। बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की यह संध्या दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गई।
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बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या में रोहित चौहान कल्पना चौहान और अमित सागर ने बांधा समां
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की छठवीं संध्या पूरी तरह गीत-संगीत के रंगों में रंगी रही। प्रसिद्ध लोक गायक रोहित चौहान,कल्पना चौहान और अमित सागर की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत युवा गायक रोहित चौहान ने गणेश,गंगा और शिव आरती से की।उनकी भक्ति से भरी प्रस्तुति ने पूरे माहौल को श्रद्धा और संगीत की भावनाओं से भर दिया।उन्होंने अपने लोकप्रिय गढ़वाली गीत ‘पहाड़ छुटी गे मांजी का आंसू देखी मेरू दिल टूटी गे’,‘मेरी पितरों की बसाई टीरी पाणी जुगता ह्वे’ समेत कई गीतों से दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शकों की फरमाइश पर उन्होंने ‘गोरी मुखुड़ी सजीली नाक मां की नथुली’ और ‘मेरी भनुली जांई च ब्यूटी पार्लर मां की’ जैसे गीत भी सुनाए,जिन पर श्रोता झूम उठे। लोक गायिका कल्पना चौहान ने अपने मधुर स्वर में ‘बदरीनाथ दैणु ह्वेगेई मि मंता लेकी अंयू छूं’ भजन से प्रस्तुति की शुरुआत की। उन्होंने ‘मन भरमेगी मेरू तेरी बांसुरी सूणी’, ‘मुंड मां लटुलों कू डिलू बण्यूं च’ और ‘जै बदरी केदारनाथ गंगोत्री जय जय’ जैसे गीतों से वातावरण को सांस्कृतिक उल्लास से भर दिया।लोक गायक अमित सागर ने अपने ऊर्जावान अंदाज़ में ‘चेत की चेत्वाली’, ‘महादेवा’ और ‘बाघ का डेरा’ जैसे गीतों पर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। देर रात तक पंडाल में तालियों की गूंज और गीतों की मिठास बनी रही। बैकुण्ठ चतुर्दशी मेले की यह संध्या दर्शकों के लिए अविस्मरणीय बन गई।