डीएनए परीक्षण से 1 वर्ष 2 माह बाद अज्ञात शव की शिनाख्त: चमोली में लापता हुए डॉ.आनंद की पहचान स्थापित
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।चमोली जनपद में लगभग एक वर्ष दो माह से चल रही एक महत्वपूर्ण और जटिल खोज का अंत डीएनए परीक्षण के माध्यम से हुआ। श्री बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए आए महाराष्ट्र निवासी डॉ.आनंद कुमार विश्वनाथ इंडी के लापता होने के बाद मिली सड़ी-गली अवस्था वाली अज्ञात शव की पहचान डीएनए रिपोर्ट से स्थापित हो गई। इस सफलता का श्रेय चमोली पुलिस की सावधानीपूर्ण जांच,लगातार निगरानी और एफएसएल देहरादून के साथ प्रभावी समन्वय को दिया जा रहा है। घटना: रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए थे डॉ.आनंद दिनांक 27 सितंबर 2024 को डॉ.आनंद बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे,जहां अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में उनका पता नहीं चला। उनके भाई डॉ.देवेंद्र विश्वनाथ इंडी ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दी,जिसके बाद पुलिस ने तत्काल व्यापक खोज अभियान शुरू किया। एसओजी और चमोली पुलिस की टीमों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले,ड्रोन सर्विलांस की मदद ली,मोबाइल लोकेशन की जांच की,तथा माणा,सरस्वती मंदिर,बस स्टैंड,टैक्सी स्टैंड और अन्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार तलाश की। परिवार ने बताया था कि डॉ.आनंद अल्जाइमर से पीड़ित थे और स्मृतिभ्रंश की समस्या रहती थी। इस आधार पर थाना श्री बद्रीनाथ में गुमशुदगी दर्ज हुई।अज्ञात शव मिलने से बढ़ी जांच की चुनौती दिनांक 19 अक्टूबर 2024 को माणा गांव के निकट केशव प्रयाग संगम के पास नदी किनारे एक अज्ञात शव सड़ी-गली अवस्था में मिला। शव का गला और चेहरा न होने के कारण पहचान कर पाना अत्यंत कठिन था। पुलिस और SDRF द्वारा शव को निकालकर पंचनामा किया गया,72 घंटे तक पहचान के लिए रखा गया और डीएनए सैंपल सुरक्षित कर एफएसएल को भेजा गया। डीएनए परीक्षण से टूटा संदेह का सन्नाटा लगातार पैरवी और प्राथमिकता दिलाने के प्रयासों के बाद एफएसएल देहरादून ने 10 नवंबर 2025 को डीएनए रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मिले शव का डीएनए,डॉ.देवेंद्र विश्वनाथ इंडी के डीएनए से पूर्ण रूप से मेल खा गया। इस प्रकार लगभग एक वर्ष दो माह बाद पुष्टि हो सकी कि वह अज्ञात शव डॉ.आनंद का ही था। चमोली पुलिस की वैज्ञानिक जांच का परिणाम इस उपलब्धि को चमोली पुलिस की वैज्ञानिक,व्यवस्थित और निरंतर जांच प्रक्रिया का परिणाम बताया जा रहा है। एफएसएल के साथ लगातार संपर्क,समयबद्ध पैरवी और अधिकारीगणों की व्यक्तिगत निगरानी इस सफलता के प्रमुख कारण रहे। परिजनों ने जताया आभार परिजनों ने कहा चमोली पुलिस ने असाधारण संवेदनशीलता और समर्पण दिखाया। लगातार प्रयासों के कारण ही हमें सच्चाई जानने का अवसर मिला। हम पूरी टीम के आभारी हैं।चमोली पुलिस का कहना है क गुमशुदा व्यक्तियों की खोज और अज्ञात शवों की पहचान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर परिवार तक सत्य और न्याय पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।
Spread the love
डीएनए परीक्षण से 1 वर्ष 2 माह बाद अज्ञात शव की शिनाख्त: चमोली में लापता हुए डॉ.आनंद की पहचान स्थापित
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।चमोली जनपद में लगभग एक वर्ष दो माह से चल रही एक महत्वपूर्ण और जटिल खोज का अंत डीएनए परीक्षण के माध्यम से हुआ। श्री बद्रीनाथ धाम में दर्शन के लिए आए महाराष्ट्र निवासी डॉ.आनंद कुमार विश्वनाथ इंडी के लापता होने के बाद मिली सड़ी-गली अवस्था वाली अज्ञात शव की पहचान डीएनए रिपोर्ट से स्थापित हो गई। इस सफलता का श्रेय चमोली पुलिस की सावधानीपूर्ण जांच,लगातार निगरानी और एफएसएल देहरादून के साथ प्रभावी समन्वय को दिया जा रहा है। घटना: रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए थे डॉ.आनंद दिनांक 27 सितंबर 2024 को डॉ.आनंद बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे,जहां अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में उनका पता नहीं चला। उनके भाई डॉ.देवेंद्र विश्वनाथ इंडी ने पुलिस कंट्रोल रूम में सूचना दी,जिसके बाद पुलिस ने तत्काल व्यापक खोज अभियान शुरू किया। एसओजी और चमोली पुलिस की टीमों ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले,ड्रोन सर्विलांस की मदद ली,मोबाइल लोकेशन की जांच की,तथा माणा,सरस्वती मंदिर,बस स्टैंड,टैक्सी स्टैंड और अन्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार तलाश की। परिवार ने बताया था कि डॉ.आनंद अल्जाइमर से पीड़ित थे और स्मृतिभ्रंश की समस्या रहती थी। इस आधार पर थाना श्री बद्रीनाथ में गुमशुदगी दर्ज हुई।अज्ञात शव मिलने से बढ़ी जांच की चुनौती दिनांक 19 अक्टूबर 2024 को माणा गांव के निकट केशव प्रयाग संगम के पास नदी किनारे एक अज्ञात शव सड़ी-गली अवस्था में मिला। शव का गला और चेहरा न होने के कारण पहचान कर पाना अत्यंत कठिन था। पुलिस और SDRF द्वारा शव को निकालकर पंचनामा किया गया,72 घंटे तक पहचान के लिए रखा गया और डीएनए सैंपल सुरक्षित कर एफएसएल को भेजा गया। डीएनए परीक्षण से टूटा संदेह का सन्नाटा लगातार पैरवी और प्राथमिकता दिलाने के प्रयासों के बाद एफएसएल देहरादून ने 10 नवंबर 2025 को डीएनए रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि मिले शव का डीएनए,डॉ.देवेंद्र विश्वनाथ इंडी के डीएनए से पूर्ण रूप से मेल खा गया। इस प्रकार लगभग एक वर्ष दो माह बाद पुष्टि हो सकी कि वह अज्ञात शव डॉ.आनंद का ही था। चमोली पुलिस की वैज्ञानिक जांच का परिणाम इस उपलब्धि को चमोली पुलिस की वैज्ञानिक,व्यवस्थित और निरंतर जांच प्रक्रिया का परिणाम बताया जा रहा है। एफएसएल के साथ लगातार संपर्क,समयबद्ध पैरवी और अधिकारीगणों की व्यक्तिगत निगरानी इस सफलता के प्रमुख कारण रहे। परिजनों ने जताया आभार परिजनों ने कहा चमोली पुलिस ने असाधारण संवेदनशीलता और समर्पण दिखाया। लगातार प्रयासों के कारण ही हमें सच्चाई जानने का अवसर मिला। हम पूरी टीम के आभारी हैं।चमोली पुलिस का कहना है क गुमशुदा व्यक्तियों की खोज और अज्ञात शवों की पहचान हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर परिवार तक सत्य और न्याय पहुँचाना हमारा कर्तव्य है।