प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल स्थित रेनबो पब्लिक स्कूल चौरास में रविवार को उत्तराखंड के अमर स्वतंत्रता सेनानी श्रीदेव सुमन की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर देशभक्ति और प्रेरणादायक विचारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उप प्रधानाचार्य रिद्धिस उनियाल द्वारा श्रीदेव सुमन के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित कर महान स्वतंत्रता सेनानी को नमन किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा में काव्य पाठ गीत और प्रेरणादायक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने अपने कार्यक्रमों के माध्यम से श्रीदेव सुमन के संघर्षपूर्ण जीवन देशभक्ति और बलिदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बताया गया कि श्रीदेव सुमन का जन्म 25 मई 1916 को टिहरी गढ़वाल जिले के चंबा क्षेत्र के जौल गांव में हुआ था। वे महान क्रांतिकारी समाजसेवी और पत्रकार थे जिन्होंने टिहरी राजशाही के खिलाफ आवाज उठाई और जनहित के लिए ऐतिहासिक 84 दिन की भूख हड़ताल की। उनके संघर्ष और बलिदान को आज भी उत्तराखंड में प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है। विद्यालय परिवार ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को देशभक्ति सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित किया गया।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल स्थित रेनबो पब्लिक स्कूल चौरास में रविवार को उत्तराखंड के अमर स्वतंत्रता सेनानी श्रीदेव सुमन की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर देशभक्ति और प्रेरणादायक विचारों से गूंज उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उप प्रधानाचार्य रिद्धिस उनियाल द्वारा श्रीदेव सुमन के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित कर महान स्वतंत्रता सेनानी को नमन किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा में काव्य पाठ गीत और प्रेरणादायक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने अपने कार्यक्रमों के माध्यम से श्रीदेव सुमन के संघर्षपूर्ण जीवन देशभक्ति और बलिदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बताया गया कि श्रीदेव सुमन का जन्म 25 मई 1916 को टिहरी गढ़वाल जिले के चंबा क्षेत्र के जौल गांव में हुआ था। वे महान क्रांतिकारी समाजसेवी और पत्रकार थे जिन्होंने टिहरी राजशाही के खिलाफ आवाज उठाई और जनहित के लिए ऐतिहासिक 84 दिन की भूख हड़ताल की। उनके संघर्ष और बलिदान को आज भी उत्तराखंड में प्रेरणा के रूप में याद किया जाता है। विद्यालय परिवार ने कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को देशभक्ति सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित किया गया।