प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। सरस्वती विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल,श्रीनगर गढ़वाल के प्राचार्य मुकेश चंद्र को शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड और मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी की ओर से प्रदान किया गया। मुकेश चंद्र लंबे समय से शिक्षा के प्रसार और उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरस्वती विद्या मंदिर ने शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है। विद्यालय में नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया गया,जिससे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकी। शिक्षा के साथ-साथ मुकेश चंद्र सामाजिक कल्याण के कार्यों में भी निरंतर सक्रिय रहे हैं।जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता,स्वास्थ्य जागरूकता अभियान,पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां और सामुदायिक विकास के कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान के साथ-साथ उत्तराखंड के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सरस्वती विद्या मंदिर की भूमिका को भी रेखांकित करता है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। सरस्वती विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल,श्रीनगर गढ़वाल के प्राचार्य मुकेश चंद्र को शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड और मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी की ओर से प्रदान किया गया। मुकेश चंद्र लंबे समय से शिक्षा के प्रसार और उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरस्वती विद्या मंदिर ने शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ छात्रों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है। विद्यालय में नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया गया,जिससे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकी। शिक्षा के साथ-साथ मुकेश चंद्र सामाजिक कल्याण के कार्यों में भी निरंतर सक्रिय रहे हैं।जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता,स्वास्थ्य जागरूकता अभियान,पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां और सामुदायिक विकास के कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान के साथ-साथ उत्तराखंड के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सरस्वती विद्या मंदिर की भूमिका को भी रेखांकित करता है। उनकी यह उपलब्धि क्षेत्र के शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।