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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल।भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान,रुड़की में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सहनशीलता विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यशाला में आपदा जोखिम न्यूनीकरण,आपदा-पूर्व तैयारी,प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया,साथ ही तकनीकी नवाचार,अनुसंधान सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए ठोस रणनीतियां तैयार की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यशाला से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड सहित संपूर्ण हिमालयी क्षेत्रों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने राज्य की भौगोलिक स्थिति के कारण आने वाली प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप,भूस्खलन,बादल फटना,अतिवृष्टि,हिमस्खलन और वनाग्नि का उल्लेख करते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण,समयबद्ध तैयारी और सामूहिक प्रयासों से इनके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।मुख्यमंत्री ने बताया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए 4P मंत्र (Predict,Prevent,Prepare,Protect) के आधार पर 10 सूत्रीय एजेंडा पर कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा आपदा-पूर्व तैयारी,एआई आधारित चेतावनी प्रणालियां,डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम,ग्लेशियर रिसर्च सेंटर,ड्रोन सर्विलांस,जीआईएस मैपिंग,सैटेलाइट मॉनिटरिंग,रैपिड रिस्पॉन्स टीमें,फॉरेस्ट फायर अर्ली वार्निंग सिस्टम और वनाग्नि प्रबंधन कार्ययोजना पर लगातार काम किया जा रहा है।इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग,वन विभाग, एनडीआरएफ,एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने आईआईटी रुड़की के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई है।राज्य सरकार आईआईटी के सहयोग से इस प्रणाली के विस्तार,भूस्खलन संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणालियों के विकास पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए राज्य में पौधारोपण,जल संरक्षण और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक पहल की जा रही हैं। जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में स्प्रिंग रिजुविनेशन अथॉरिटी द्वारा भी कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से सुरक्षित घरों और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ध्यान देने तथा अधिकारियों से सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। कार्यशाला में प्रो.संदीप सिंह ने आपदा प्रबंधन को केवल प्रतिक्रिया आधारित दृष्टिकोण तक सीमित न रखकर पूर्वानुमान आधारित और प्रौद्योगिकी सक्षम लचीलापन अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने भू-विज्ञान,रियल टाइम डेटा और अंतर्विषयी शोध की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया तथा हिमालय केंद्रित अनुसंधान को आगे बढ़ाने में सहयोग की सराहना की। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो.के.के.पंत ने कहा कि आपदा लचीलापन को सतत विकास की आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए,जो विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप हो। उन्होंने बताया कि संस्थान सरकार,उद्योग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर आपदा-रोधी अवसंरचना और कुशल मानव संसाधन विकसित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। विशिष्ट अतिथि भगवती प्रसाद राघव ने आपदा तैयारी में सामाजिक सहभागिता,नैतिक नेतृत्व और समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक,नीति और सामुदायिक कार्रवाई के समन्वय से ही वास्तविक लचीलापन संभव है। कार्यशाला में वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान के निदेशक,एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारी,रक्षा इंजीनियरिंग प्रतिष्ठानों और राष्ट्रीय शोध संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर जोनल कॉर्डिनेटर प्रज्ञा प्रवाह,उप निदेशक आईआईटी रुड़की प्रो.यू.पी.सिंह,प्रो.संदीप सिंह,ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ,सीओ विवेक कुमार सहित विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिक और आईआईटी रुड़की के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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