प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल।स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत पोस्टपार्टम इंट्रायूटेरिन कॉन्ट्रासेप्टिव डिवाइस पीपीआईयूसीडी विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण का 22 जनवरी 2026 को समापन किया गया। यह प्रशिक्षण 20 जनवरी से संचालित किया जा रहा था।मुख्य चिकित्साधिकारी पौड़ी डॉ.शिव मोहन शुक्ला के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में जनपद के विभिन्न ब्लॉकों के प्रसव केंद्रों से आए नर्सिंग अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ नवज्योति बोरा ने प्रतिभागियों को पीपीआईयूसीडी के संबंध में सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।प्रशिक्षण के दौरान पीपीआईयूसीडी की उपयोगिता,लाभ,सावधानियां और इसे लगाने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ.नवज्योति बोरा ने बताया कि पीपीआईयूसीडी महिलाओं के लिए लंबे समय तक गर्भ निरोध का सुरक्षित और प्रभावी अस्थाई साधन है,जिसे प्रसव के तुरंत बाद गर्भनिरोधक के रूप में लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि जो महिलाएं लंबे समय तक गर्भ निरोध चाहती हैं या बच्चों के बीच अंतर रखना चाहती हैं,उनके लिए कॉपर टी 380ए दस वर्ष तथा कॉपर टी 375 पांच वर्ष तक प्रभावी रहती है,जो सरकारी चिकित्सा इकाइयों में निःशुल्क उपलब्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि पीपीआईयूसीडी को प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में लगाया और निकाला जाना चाहिए। इसे प्रसव के तुरंत बाद,48 घंटे के भीतर या सीजेरियन के दौरान लगाया जा सकता है।स्तनपान कराने वाली महिलाएं भी इसका सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकती हैं और इसे निकलवाने के बाद प्रजनन क्षमता तुरंत वापस आ जाती है।प्रशिक्षण के समापन अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनय कुमार त्यागी ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने नर्सिंग अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे फील्ड स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएं और बास्केट ऑफ चॉइस के आधार पर चिकित्सा इकाइयों में परिवार नियोजन सेवाएं सुनिश्चित करें।इस अवसर पर परिवार नियोजन परामर्शदाता विजय लक्ष्मी,जिला आईईसी कोऑर्डिनेटर शकुंतला नेगी,अनुप्रिया,भाग्यलता सहित ब्लॉक स्तर से आए नर्सिंग अधिकारी उपस्थित रहे।
पौड़ी में पीपीआईयूसीडी पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न नर्सिंग अधिकारियों को दी गई व्यावहारिक जानकारी
