प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के उत्तरी और दक्षिणी जखोली रेंज में वन्य जीवों संग सह-अस्तित्व को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तितली ट्रस्ट के वन्य जीव विशेषज्ञ राजेश भट्ट और अन्य द्वारा जीवन में वन्य जीवों की महत्ता विषय पर प्रशिक्षण दिया गाय। विशेषज्ञ भट्ट ने बताया कि किस तरह जीव और वन के मेल के बिना जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के बिना वन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसीलिए मानव का वन्य जीवों संग सह अस्तित्व ही जीवन जीने का एक मात्र मार्ग है। कार्यशाला में दोनों वन क्षेत्राधिकारी एवं समस्त कर्मचारियों के अलावा विभिन्न वन पंचायतों के सरपंच और गढ़वाल विश्वविद्यालय के वानिकी के छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में विषय संबंधी विभिन्न प्रश्न पूछकर प्रशिक्षण को पारस्परिक संवादात्मक बनाए रखा। कार्यशाला में वन पंचायत सरपंच भूपेन्द्र कुमार,सतीश रतूड़ी,जयकृष्ण नौटियाल,भगवान सिंह,लक्ष्मण सिंह आदि ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं करवा कर आम जन मानस को वन्य जीवों से जोड़े जाने का वन विभाग का प्रयास सराहनीय है।
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प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के उत्तरी और दक्षिणी जखोली रेंज में वन्य जीवों संग सह-अस्तित्व को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तितली ट्रस्ट के वन्य जीव विशेषज्ञ राजेश भट्ट और अन्य द्वारा जीवन में वन्य जीवों की महत्ता विषय पर प्रशिक्षण दिया गाय। विशेषज्ञ भट्ट ने बताया कि किस तरह जीव और वन के मेल के बिना जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के बिना वन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसीलिए मानव का वन्य जीवों संग सह अस्तित्व ही जीवन जीने का एक मात्र मार्ग है। कार्यशाला में दोनों वन क्षेत्राधिकारी एवं समस्त कर्मचारियों के अलावा विभिन्न वन पंचायतों के सरपंच और गढ़वाल विश्वविद्यालय के वानिकी के छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में विषय संबंधी विभिन्न प्रश्न पूछकर प्रशिक्षण को पारस्परिक संवादात्मक बनाए रखा। कार्यशाला में वन पंचायत सरपंच भूपेन्द्र कुमार,सतीश रतूड़ी,जयकृष्ण नौटियाल,भगवान सिंह,लक्ष्मण सिंह आदि ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं करवा कर आम जन मानस को वन्य जीवों से जोड़े जाने का वन विभाग का प्रयास सराहनीय है।