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प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।आज मां चंडिका की डोली ने पूर्व वर्षों की भांति अगस्त्यमुनि सैंण स्थित गद्दीस्थल में पारंपरिक मार्ग से विधिवत प्रवेश किया। इस यात्रा के सफल संपन्न होने से यह स्पष्ट हो गया कि परंपरागत मार्ग पूरी तरह सुगम,स्वच्छ और उपयोग योग्य था। गौरतलब है कि 15 जनवरी 2026 को महर्षि अगस्त्य मुनि महाराज की देवरा यात्रा के दौरान कुछ तत्वों द्वारा यह भ्रामक प्रचार किया गया था कि परंपरागत मार्ग अवरुद्ध और अनुपयोगी है। इसी आधार पर डोली को क्रीड़ा भवन अगस्त्यमुनि के मुख्य द्वार से ले जाने का दबाव बनाया गया। इस दौरान क्रीड़ा भवन के मुख्य गेट को क्षति पहुंची और नेशनल हाईवे-107 पर यातायात भी बाधित हुआ। मां चंडिका की डोली द्वारा उसी पारंपरिक मार्ग का सफलतापूर्वक उपयोग किया जाना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि 15 जनवरी की घटना परंपरा या व्यवस्था से जुड़ी नहीं थी,बल्कि जानबूझकर अव्यवस्था उत्पन्न करने का प्रयास किया गया। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि क्रीड़ा भवन के मुख्य गेट को तोड़ा जाना पूर्व नियोजित कृत्य था। जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों की पहचान कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें और धार्मिक परंपराओं की गरिमा तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में सहयोग करें।

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