श्री श्याम पोर्टल-प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के सीमांत क्षेत्रों में पशुपालकों के मवेशियों को बेहतर और त्वरित उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत पशुपालन विभाग और भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल के सहयोग से वेटरनरी मेडिकेयर यूनिट वाहन उपलब्ध कराया गया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी गौरव कुमार ने वेटरनरी मेडिकेयर यूनिट वाहन को भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल को सौंपा। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांवों में विकास कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह वेटरनरी मोबाइल वाहन उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि वेटरनरी मोबाइल वाहन का संचालन भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल द्वारा किया जाएगा,जबकि वाहन के लिए आवश्यक दवाइयों और अन्य संसाधनों की आपूर्ति पशुपालन विभाग की ओर से सुनिश्चित की जाएगी। वाहन के सुचारु और नियमित संचालन के लिए पशुपालन विभाग और आईटीबीपी के बीच आपसी समन्वय और अनुबंध किया गया है,ताकि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पशुपालकों को समय पर पशु चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। इस पहल से सीमांत गांवों में पशुपालकों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और पशुधन की सेहत में भी सुधार होगा। कार्यक्रम में परियोजना निदेशक आनंद सिंह,आईटीबीपी गौचर के द्वितीय कमान अधिकारी डॉ गौतम कुमार पंकज और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी असीम देब सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई कि यह पहल सीमांत क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत करने और पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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श्री श्याम पोर्टल-प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के सीमांत क्षेत्रों में पशुपालकों के मवेशियों को बेहतर और त्वरित उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत एक नई पहल शुरू की है। इस पहल के तहत पशुपालन विभाग और भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल के सहयोग से वेटरनरी मेडिकेयर यूनिट वाहन उपलब्ध कराया गया है। शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी गौरव कुमार ने वेटरनरी मेडिकेयर यूनिट वाहन को भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल को सौंपा। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा द्वितीय रक्षा पंक्ति के गांवों में विकास कार्यों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह वेटरनरी मोबाइल वाहन उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि वेटरनरी मोबाइल वाहन का संचालन भारत–तिब्बत सीमा पुलिस बल द्वारा किया जाएगा,जबकि वाहन के लिए आवश्यक दवाइयों और अन्य संसाधनों की आपूर्ति पशुपालन विभाग की ओर से सुनिश्चित की जाएगी। वाहन के सुचारु और नियमित संचालन के लिए पशुपालन विभाग और आईटीबीपी के बीच आपसी समन्वय और अनुबंध किया गया है,ताकि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में पशुपालकों को समय पर पशु चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। इस पहल से सीमांत गांवों में पशुपालकों को अपने मवेशियों के इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और पशुधन की सेहत में भी सुधार होगा। कार्यक्रम में परियोजना निदेशक आनंद सिंह,आईटीबीपी गौचर के द्वितीय कमान अधिकारी डॉ गौतम कुमार पंकज और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी असीम देब सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई कि यह पहल सीमांत क्षेत्रों में पशुपालन को मजबूत करने और पशुपालकों की आजीविका को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।