श्री श्याम पोर्टल-प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल में नगर निगम बोर्ड के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित विकास कु एक साल कार्यक्रम में महापौर आरती भंडारी एक बार फिर सादगी,गरिमा और परंपरा की मिसाल बनकर सामने आईं। इस अवसर पर वे पारंपरिक पहाड़ी परिधान में उपस्थित रहीं,जिसने पूरे कार्यक्रम को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने का काम किया। महापौर आरती भंडारी केवल नगर के विकास कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं,बल्कि वे प्रत्येक सार्वजनिक कार्यक्रम में गढ़वाली संस्कृति और परंपराओं को आत्मसात करती नजर आती हैं। नगर निगम के औपचारिक आयोजनों से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक उनका पहाड़ी परिधान यह संदेश देता है कि आधुनिक प्रशासन के साथ अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। इससे पूर्व भी बैकुंठ चतुर्दशी मेले सहित विभिन्न अवसरों पर महापौर को पहाड़ी परिधान में देखा गया है,जिसे स्थानीय लोगों ने खूब सराहा। उनका यह सांस्कृतिक अंदाज क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रेरक संदेश भी देता है। शहरवासियों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं अपनी संस्कृति को अपनाते हैं,तो समाज में परंपराओं के प्रति गर्व और आत्मीयता का भाव और मजबूत होता है। महापौर आरती भंडारी की यह सांस्कृतिक पहचान अब श्रीनगर की एक अलग और सकारात्मक पहचान बनती जा रही
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श्री श्याम पोर्टल-प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल में नगर निगम बोर्ड के एक वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित विकास कु एक साल कार्यक्रम में महापौर आरती भंडारी एक बार फिर सादगी,गरिमा और परंपरा की मिसाल बनकर सामने आईं। इस अवसर पर वे पारंपरिक पहाड़ी परिधान में उपस्थित रहीं,जिसने पूरे कार्यक्रम को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने का काम किया। महापौर आरती भंडारी केवल नगर के विकास कार्यों तक ही सीमित नहीं हैं,बल्कि वे प्रत्येक सार्वजनिक कार्यक्रम में गढ़वाली संस्कृति और परंपराओं को आत्मसात करती नजर आती हैं। नगर निगम के औपचारिक आयोजनों से लेकर सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक उनका पहाड़ी परिधान यह संदेश देता है कि आधुनिक प्रशासन के साथ अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। इससे पूर्व भी बैकुंठ चतुर्दशी मेले सहित विभिन्न अवसरों पर महापौर को पहाड़ी परिधान में देखा गया है,जिसे स्थानीय लोगों ने खूब सराहा। उनका यह सांस्कृतिक अंदाज क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति सम्मान को दर्शाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रेरक संदेश भी देता है। शहरवासियों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं अपनी संस्कृति को अपनाते हैं,तो समाज में परंपराओं के प्रति गर्व और आत्मीयता का भाव और मजबूत होता है। महापौर आरती भंडारी की यह सांस्कृतिक पहचान अब श्रीनगर की एक अलग और सकारात्मक पहचान बनती जा रही