बंजर भूमि पर गुलाब चंदन और स्ट्रॉबेरी की खेती महिलाओं ने आजीविका संवर्धन की बनाई योजना
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।विकासखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत नगरशाल व बीरोदेवल गांव की महिलाओं एवं ग्रामीणों ने एक प्रेरणादायक पहल करते हुए बंजर पड़ी भूमि को उपजाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जय मां चंडिका स्वयं सहायता समूह,जाख देवता,गोरया क्लब,नाग देवता समूह एवं मेहनत समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास करते हुए गुलाब,रोजमेरी,चंदन के पौधे,स्टॉबेरी और केला जैसे पौधों का रोपण किया जायेगा जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया जायेगा,बल्कि इससे अपनी आजीविका को भी नया आयाम देने की शुरुआत की जाएगी।इस पहल के तहत महिलाएं इन पौधों की देखरेख कर इनसे होने वाली आय को अपनी जीविका के रूप में इस्तेमाल करेंगी। अब तक अनुपयोगी पड़ी भूमि पर खेती कर समूहों ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठित प्रयासों से किसी भी संसाधन का समुचित उपयोग किया जा सकता है।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ.जी.एस.खाती ने गांव पहुंचकर परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और महिलाओं तथा ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आप सभी द्वारा गुलाब,रोजमेरी,चंदन व स्टॉबेरी जैसी फसलों की खेती करना न सिर्फ आपकी आय का स्रोत बनेगा,बल्कि गांव की बंजर पड़ी भूमि भी उपयोग में लाई जा सकेगी। यह पहल अन्य गांवों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।मुख्य विकास अधिकारी डॉ.जी.एस.खाती ने संबंधित विभागों को इस कार्य में पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए।उन्होंने महिला समूहों को तकनीकी सहायता,बाजार उपलब्धता और पौधों की देखरेख में हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान एवं प्रशासक सुनीता देवी,ग्रामीण प्रतिनिधि आशुतोष भंडारी,खंड विकास अधिकारी प्रवीण भट्ट,अगस्त्यमुनि,सहायक उद्यान अधिकारी प्रकाश आर्य,ग्राम विकास अधिकारी हेमंत तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।
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बंजर भूमि पर गुलाब चंदन और स्ट्रॉबेरी की खेती महिलाओं ने आजीविका संवर्धन की बनाई योजना
प्रदीप कुमार
रूद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल।विकासखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत नगरशाल व बीरोदेवल गांव की महिलाओं एवं ग्रामीणों ने एक प्रेरणादायक पहल करते हुए बंजर पड़ी भूमि को उपजाऊ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जय मां चंडिका स्वयं सहायता समूह,जाख देवता,गोरया क्लब,नाग देवता समूह एवं मेहनत समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास करते हुए गुलाब,रोजमेरी,चंदन के पौधे,स्टॉबेरी और केला जैसे पौधों का रोपण किया जायेगा जिससे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया जायेगा,बल्कि इससे अपनी आजीविका को भी नया आयाम देने की शुरुआत की जाएगी।इस पहल के तहत महिलाएं इन पौधों की देखरेख कर इनसे होने वाली आय को अपनी जीविका के रूप में इस्तेमाल करेंगी। अब तक अनुपयोगी पड़ी भूमि पर खेती कर समूहों ने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठित प्रयासों से किसी भी संसाधन का समुचित उपयोग किया जा सकता है।इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी डॉ.जी.एस.खाती ने गांव पहुंचकर परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और महिलाओं तथा ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आप सभी द्वारा गुलाब,रोजमेरी,चंदन व स्टॉबेरी जैसी फसलों की खेती करना न सिर्फ आपकी आय का स्रोत बनेगा,बल्कि गांव की बंजर पड़ी भूमि भी उपयोग में लाई जा सकेगी। यह पहल अन्य गांवों के लिए भी एक उदाहरण बनेगी।मुख्य विकास अधिकारी डॉ.जी.एस.खाती ने संबंधित विभागों को इस कार्य में पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए।उन्होंने महिला समूहों को तकनीकी सहायता,बाजार उपलब्धता और पौधों की देखरेख में हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।इस अवसर पर ग्राम प्रधान एवं प्रशासक सुनीता देवी,ग्रामीण प्रतिनिधि आशुतोष भंडारी,खंड विकास अधिकारी प्रवीण भट्ट,अगस्त्यमुनि,सहायक उद्यान अधिकारी प्रकाश आर्य,ग्राम विकास अधिकारी हेमंत तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे।