प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय स्थित ब्लड सेंटर में शुक्रवार को टैक्नीशियन नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को सीपीआर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ब्लड सेंटर कर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक कौशल से लैस करना और चिकित्सा समुदाय के साथ-साथ आम नागरिकों की सहायता के लिए तैयार करना रहा। प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने प्रतिभागियों को सीपीआर तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति की दिल की धड़कन बंद हो जाए सांस रुक जाए या पल्स न मिले तो तुरंत सीपीआर देना सबसे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कदम होता है। डॉ.सिंह ने कहा कि सीपीआर के दौरान हृदय और मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है और समय पर यह प्रक्रिया मिलने से व्यक्ति को नई जिंदगी मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों ने सीपीआर देने की विधि को प्रायोगिक रूप से सीखा तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तैयारी दिखाई।उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों से उनकी टीम द्वारा विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में 2500 से अधिक लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कार्यक्रम में ब्लड सेंटर की प्रभारी डॉ दीपा हटवाल सहित ब्लड सेंटर के टैक्नीशियन नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। इस प्रशिक्षण को चिकित्सा क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने और आम जनमानस में जीवनरक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस चिकित्सालय स्थित ब्लड सेंटर में शुक्रवार को टैक्नीशियन नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों को सीपीआर कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ब्लड सेंटर कर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक कौशल से लैस करना और चिकित्सा समुदाय के साथ-साथ आम नागरिकों की सहायता के लिए तैयार करना रहा। प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.अजेय विक्रम सिंह ने प्रतिभागियों को सीपीआर तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति की दिल की धड़कन बंद हो जाए सांस रुक जाए या पल्स न मिले तो तुरंत सीपीआर देना सबसे महत्वपूर्ण जीवनरक्षक कदम होता है। डॉ.सिंह ने कहा कि सीपीआर के दौरान हृदय और मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बनाए रखने में मदद मिलती है और समय पर यह प्रक्रिया मिलने से व्यक्ति को नई जिंदगी मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों ने सीपीआर देने की विधि को प्रायोगिक रूप से सीखा तथा आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने की तैयारी दिखाई।उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों से उनकी टीम द्वारा विभिन्न स्कूलों और संस्थानों में 2500 से अधिक लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कार्यक्रम में ब्लड सेंटर की प्रभारी डॉ दीपा हटवाल सहित ब्लड सेंटर के टैक्नीशियन नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। इस प्रशिक्षण को चिकित्सा क्षेत्र में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने और आम जनमानस में जीवनरक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।