प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विज्ञान दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में विज्ञान में महिलाएँ विकसित भारत की प्रेरक शक्ति विषय पर विशेष कार्यक्रम एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 की अवधारणा के संदर्भ में विज्ञान तथा महिला वैज्ञानिकों की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.रूचि बंसल ने विज्ञान में महिलाओं की यात्रा अवसर एवं चुनौतियाँ विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी उपलब्ध अवसरों और सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार इन योजनाओं के माध्यम से महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने विज्ञान प्रौद्योगिकी अभियांत्रिकी एवं गणित के क्षेत्रों में लैंगिक अंतर को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया और युवाओं को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। डॉ.बंसल ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिला वैज्ञानिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। विभागाध्यक्ष प्रो.पूजा सकलानी ने अपने संबोधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान नवाचार और वैज्ञानिक सोच को अपनाने का आह्वान किया तथा कहा कि राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में प्रो.ममता आर्य डॉ.सौरभ यादव डॉ.संजय पटेल डॉ.बबीता राणा तथा डॉ.पवन सिंह राणा सहित विभाग के शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने विषय पर अपने विचार साझा किए और महिला वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को सशक्त बनाने और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विज्ञान दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग में विज्ञान में महिलाएँ विकसित भारत की प्रेरक शक्ति विषय पर विशेष कार्यक्रम एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में विकसित भारत 2047 की अवधारणा के संदर्भ में विज्ञान तथा महिला वैज्ञानिकों की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.रूचि बंसल ने विज्ञान में महिलाओं की यात्रा अवसर एवं चुनौतियाँ विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी उपलब्ध अवसरों और सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार इन योजनाओं के माध्यम से महिलाएं विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने विज्ञान प्रौद्योगिकी अभियांत्रिकी एवं गणित के क्षेत्रों में लैंगिक अंतर को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया और युवाओं को शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। डॉ.बंसल ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महिला वैज्ञानिकों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। विभागाध्यक्ष प्रो.पूजा सकलानी ने अपने संबोधन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुसंधान नवाचार और वैज्ञानिक सोच को अपनाने का आह्वान किया तथा कहा कि राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में प्रो.ममता आर्य डॉ.सौरभ यादव डॉ.संजय पटेल डॉ.बबीता राणा तथा डॉ.पवन सिंह राणा सहित विभाग के शोधार्थी एवं स्नातकोत्तर छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने विषय पर अपने विचार साझा किए और महिला वैज्ञानिकों के योगदान को सराहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को सशक्त बनाने और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।