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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। महिला दिवस पर नारी शक्ति का शंखनाद पुलिस परिवार की निकिता रावत ने भोजपत्र शिल्प से लिखी आत्मनिर्भरता की नई इबारत राज्यपाल से लेकर मुख्यमंत्री तक हुए मुरीद आज 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के पावन अवसर पर चमोली पुलिस एक ऐसी प्रेरणादायक नारी शक्ति की कहानी साझा कर रही है जिन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया बल्कि उत्तराखंड की विलुप्त होती भोजपत्र कला को नई पहचान दिलाकर उसे राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का कार्य किया है। हम बात कर रहे हैं पुलिस लाइन गोपेश्वर में तैनात प्रतिसार निरीक्षक आनंद सिंह रावत की धर्मपत्नी निकिता रावत की जिन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी प्रतिभा मेहनत और नवाचार के बल पर एक अलग पहचान स्थापित की है। बच्चों की देखभाल और पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए उनकी यही पहल उन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) काशीपुर के FIED (Foundation for Innovation & Entrepreneurship Development) में शॉर्टलिस्ट होने तक ले गई जहाँ उन्होंने अपने जिले चमोली का प्रतिनिधित्व करते हुए भोजपत्र आधारित हस्तनिर्मित उत्पादों को एक नए आयाम के साथ प्रस्तुत किया। निकिता रावत ने एम.एससी.मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की शिक्षा प्राप्त की है तथा एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट के रूप में मेडिकल कॉलेज फार्मास्यूटिकल कॉस्मेटिक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्रों में कार्य करते हुए शोध एवं विकास में महत्वपूर्ण अनुभव अर्जित किया है। इससे पूर्व वे सिडकुल में भी कार्यरत रह चुकी हैं। निकिता रावत महिला सशक्तिकरण की उस मिसाल का नाम हैं जिन्होंने उत्तराखंड की प्राचीन और विलुप्त होती भोजपत्र कला को अपनी आजीविका और पहचान का आधार बनाया। जनजातीय शिल्प इंडिया लिमिटेड के माध्यम से उन्होंने भोजपत्र से बने हस्तनिर्मित उत्पादों को एक नई पहचान दी है। प्राचीन समय में भोजपत्र का उपयोग धार्मिक कार्यों जन्मकुंडली लेखन तथा वेद-पुराण और यंत्रों को लिखने के लिए किया जाता था किंतु आधुनिक कागज और अन्य माध्यमों के आने से यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही थी। निकिता रावत ने अपनी रचनात्मक सोच और नवाचार के माध्यम से इसी पवित्र भोजपत्र को हेरिटेज एवं सांस्कृतिक हस्तशिल्प के रूप में नया आयाम दिया है। हाल ही में आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 में निकिता रावत के स्टॉल ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भोजपत्र से कस्टमाइज नेमप्लेट की-चेन वॉल क्लॉक डिजिटल आमंत्रण पत्र लालटेन पर कलाकृतियाँ वेस्ट मटेरियल से सजावटी उत्पाद चीड़ के छंतु से बने आभूषण तथा आकर्षक ईयरिंग्स जैसे अनेक आधुनिक उत्पाद तैयार कर सतत आजीविका और हरित व्यवसाय का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया है। साथ ही वे स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को भी बढ़ावा दे रही हैं। निकिता रावत की इस अनूठी पहल की सराहना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गीता धामी वन मंत्री सुबोध उनियाल तथा पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ द्वारा भी की जा चुकी है। इसी क्रम में उन्हें Uttishtha 2026 कार्यक्रम के लिए आमंत्रण प्राप्त हुआ जिसका आयोजन IIM काशीपुर के FIED द्वारा किया गया। यहाँ उनके भोजपत्र हस्तनिर्मित उत्पादों को नवाचार सांस्कृतिक संरक्षण और महिला उद्यमिता के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सराहा गया। इसके अतिरिक्त हाल ही में देहरादून के लोक भवन में आयोजित बसंतोत्सव 2026 में भी निकिता रावत की प्रतिभा को विशेष सम्मान मिला जहाँ माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त गुरमीत सिंह द्वारा उन्हें विजयश्री भोजपत्र लेखा के लिए सम्मान से नवाजा गया। यह उपलब्धि न केवल चमोली पुलिस बल्कि पूरे उत्तराखंड पुलिस परिवार के लिए गर्व का विषय है। निकिता रावत का यह कार्य प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को धरातल पर साकार करता है। वे न केवल पारंपरिक हस्तशिल्प को पुनर्जीवित कर रही हैं बल्कि देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं।पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने निकिता रावत की इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा निकिता रावत हमारे पुलिस परिवार का गौरव हैं। एक पुलिस अधिकारी की पत्नी होने के साथ-साथ उन्होंने अपनी स्वतंत्र पहचान बनाकर उत्तराखंड की पारंपरिक कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। महिला दिवस पर उनकी यह सफलता हर महिला के लिए प्रेरणा है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। चमोली पुलिस परिवार उनके इस हरित एवं सतत प्रयास में सदैव उनके साथ है। नारी केवल परिवार की शक्ति नहीं बल्कि समाज और संस्कृति की सशक्त धरोहर भी है।

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