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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एक्टिविटी सेंटर में आज इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया आईजीएसआई गढ़वाल चैप्टर की वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.योगेंद्र नारायण उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में डॉ.योगेंद्र नारायण ने समाज में सद्भावना सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने तक सीमित न रहें बल्कि उन्हें सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। इंडियन ट्रस्ट फॉर रूरल हेरिटेज एंड डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने विरासत संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि आज हमारी राष्ट्रीय धरोहरों को दो रूप से खतरा है एक मनुष्य के हस्तक्षेप से और दूसरा जलवायु परिवर्तन से। इन विरासतों के संरक्षण के लिए सीएसआर फंड उपलब्ध कराया जाएगा जिससे इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट का उद्देश्य धरोहर स्थलों को आय के स्रोत में परिवर्तित करना है ताकि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने सोशल वॉरियर्स की भूमिका और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग सामाजिक विकास में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान गढ़वाल चैप्टर के अध्यक्ष प्रो.एम.एम. सेमवाल ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए चैप्टर की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्ग पर कचरा निस्तारण स्थलों की पहचान शौचालयों की कमी और पहाड़ी क्षेत्रों में कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य पारंपरिक विरासत का दस्तावेजीकरण कर उसका संरक्षण करना और आमजन में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है। समिति की उपाध्यक्ष प्रो.सीमा धवन ने सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए सोसायटी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रो.पूजा सकलानी ने किया और प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या के समाधान हेतु व्यक्तिगत प्रयासों पर बल दिया। राजनीति विज्ञान विभाग की शोधार्थी सुलक्षणा शर्मा ने पहाड़ी क्षेत्रों में ऊर्जा संकट और उजड़ते गांवों की समस्या पर प्रकाश डालते हुए सौर ऊर्जा के महत्व को बताया। शिक्षा विभाग की शोधार्थी स्नेहलता ने सांकेतिक भाषा के महत्व पर चर्चा की जबकि एक छात्र ने पहाड़ी भोजन की लुप्त होती परंपरा पर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर प्रो.सीमा धवन संस्था के सचिव प्रो.सतीश सती प्रो.महेंद्र बाबू डॉ.शेखर बहुगुणा डॉ.वरुण बड़थ्वाल डॉ.विजय सिंह बिष्ट डॉ.आशीष बहुगुणा डॉ.जसपाल चौहान डॉ.प्रकाश सिंह डॉ.गिरीश भट्ट डॉ.अन्नू राही सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।अंत में डॉ.राकेश नेगी ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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