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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर में लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र द्वारा आयोजित लोक संगीत कार्यशाला नरेंद्र संगीत सप्ताह के छठे दिन कलाकारों ने नेगी के गीतों की लाजवाब प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में श्रोता पूरे मनोयोग से जुड़े रहे और कलाकारों द्वारा किया गया गीतों का चयन दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहा जिससे पूरा वातावरण सांस्कृतिक रंग में सराबोर हो उठा। कार्यक्रम में पहुंचे पौड़ी के विधायक राजकुमार पोरी ने कहा कि यह आयोजन हमारी संस्कृति की पहचान है जहां श्रोताओं को अपनी परंपराओं के विविध रंग देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेगी के गीतों पर शोध हो रहा है और नई पीढ़ी उनके गीतों से सीख रही है जिससे यह कार्यक्रम और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि नेगी का रचना संसार हमारी संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। नगर निगम श्रीनगर की महापौर आरती भंडारी ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारी भाषा संस्कृति और संस्कारों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि नेगी के गीतों में इस माटी की महक और संस्कृति का प्रतिनिधित्व स्पष्ट झलकता है।उन्होंने यह भी कहा कि नेगी ऐसे रचनाकार हैं जिनके गीतों को तीन-तीन पीढ़ियां एक साथ बैठकर सुन सकती हैं और उनके नाम से ही मन श्रद्धा से भर जाता है। मिजोरम विश्वविद्यालय से आए स्कूल ऑफ अर्थ साइंस के प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद सती ने कहा कि यह उनके लिए अद्भुत संयोग है कि जिन गीतों को सुनते हुए वे बड़े हुए आज उन्हीं पर आधारित कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। उन्होंने इस आयोजन को एक सांस्कृतिक अनुष्ठान बताया जो हमारी विरासत को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रहा है। इस अवसर पर शोधकर्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत ने कहा कि नेगी ऐसे गायक हैं जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि उनकी गायकी की विशिष्टता ऐसी है कि आज तक कोई उनकी शैली की बराबरी नहीं कर पाया है और वे आज भी उसी ऊर्जा के साथ सृजन कर रहे हैं।
इन कलाकारों को किया गया सम्मानित


नरेंद्र संगीत सप्ताह के छठे दिन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।राजेंद्र पंवार ने जौ जस देई दैणु ह्वे जैई प्रदीप कुमार ने तेरी पीड़ा मा द्वी आंसु मेरा भी प्रेमलता रावत ने असाड़ कुएड़ी लौंकण से पैली आयुषी कांडपाल ने द्वी गती बैशाख सुर्मा माही कंडवाल ने फ्योंली ज्वान ह्वेगे अमित खंडूड़ी ने पैर-पैर गौरा तू अभिषेक रावत ने भलु लगद भनुलि तेरु सोनाली ने माछी पाणी सि ज्यू तेरु-मेरु विमल सोनियाल ने रोग पुरणू कटे जिंदगी नई ह्वेगे उत्कर्ष नेगी ने सुपिन्यु ह्वे होलु कि बैम रै होलु तथा आयुषी बेदवाल ने हे जी सार्यूं मा फूलीगे होलि फ्यूंली लयड़ि गीत प्रस्तुत किए। सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

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