प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचे जहां उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण कर विकास कार्यों का जायजा लिया और स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर और स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांव की शत प्रतिशत लखपति दीदियों से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद न केवल उनकी आजीविका को सशक्त बना रहे हैं बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील की ताकि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है। जो गांव पहले अंतिम माने जाते थे उन्हें अब प्रथम गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है जिससे रोजगार पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव आज आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यहां 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं और सभी महिलाएं लखपति दीदी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। गांव में सुनंदा महिला ग्राम संगठन और योगबद्री क्लस्टर स्तरीय संगठन भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। गांव की महिलाएं ऊनी वस्त्र हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट फर्नीचर टोकरी निर्माण दाल कालीन पापड़ मसाले और भोजनालय संचालन जैसे कार्यों में संलग्न हैं। इसके अलावा कृषि पशुपालन डेयरी होमस्टे मत्स्य पालन मुर्गी पालन मशरूम उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से भी स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। इन उत्पादों को सरस मॉल और विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। माणा गांव महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और महिलाओं की मेहनत ने विकास की नई मिसाल स्थापित की है।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचे जहां उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण कर विकास कार्यों का जायजा लिया और स्थानीय लोगों व श्रद्धालुओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया।मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर और स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए आभार व्यक्त करते हुए स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांव की शत प्रतिशत लखपति दीदियों से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पाद न केवल उनकी आजीविका को सशक्त बना रहे हैं बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूती दे रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील की ताकि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है। जो गांव पहले अंतिम माने जाते थे उन्हें अब प्रथम गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है जिससे रोजगार पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव आज आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। यहां 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं और सभी महिलाएं लखपति दीदी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। गांव में सुनंदा महिला ग्राम संगठन और योगबद्री क्लस्टर स्तरीय संगठन भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। गांव की महिलाएं ऊनी वस्त्र हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट फर्नीचर टोकरी निर्माण दाल कालीन पापड़ मसाले और भोजनालय संचालन जैसे कार्यों में संलग्न हैं। इसके अलावा कृषि पशुपालन डेयरी होमस्टे मत्स्य पालन मुर्गी पालन मशरूम उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से भी स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। इन उत्पादों को सरस मॉल और विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। माणा गांव महिला सशक्तिकरण आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और महिलाओं की मेहनत ने विकास की नई मिसाल स्थापित की है।