प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला से जुड़े अन्वेषक डॉ.आलोक सागर गौतम और केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान के वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के डॉ.चिन्मय मलिक का चयन 17वें भारतीय आर्कटिक अभियान 2026-27 के अंतर्गत एक वैज्ञानिक परियोजना के लिए किया गया है। यह अभियान गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च द्वारा आयोजित किया जा रहा है। दोनों वैज्ञानिकों की शोध परियोजना को वायुमंडलीय विज्ञान थीम के अंतर्गत फील्ड एक्सेस के लिए अनुशंसा प्राप्त हुई है। चयनित परियोजना विभिन्न परिवेशीय ओजोन स्तरों पर नए कणों के निर्माण के अध्ययन पर आधारित है। इस शोध का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में ओजोन के अलग-अलग स्तरों के प्रभाव में नए कणों के निर्माण की प्रक्रिया को समझना है। अभियान के पहले चरण में डॉ.चिन्मय मलिक भाग लेंगे जबकि दूसरे चरण में डॉ.आलोक सागर गौतम अभियान से जुड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ.आलोक सागर गौतम इससे पहले भी भारतीय अंटार्कटिका अभियान में भाग ले चुके हैं और ध्रुवीय क्षेत्रों में शोध का अनुभव रखते हैं।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग की हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला से जुड़े अन्वेषक डॉ.आलोक सागर गौतम और केंद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान के वायुमंडलीय विज्ञान विभाग के डॉ.चिन्मय मलिक का चयन 17वें भारतीय आर्कटिक अभियान 2026-27 के अंतर्गत एक वैज्ञानिक परियोजना के लिए किया गया है। यह अभियान गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च द्वारा आयोजित किया जा रहा है। दोनों वैज्ञानिकों की शोध परियोजना को वायुमंडलीय विज्ञान थीम के अंतर्गत फील्ड एक्सेस के लिए अनुशंसा प्राप्त हुई है। चयनित परियोजना विभिन्न परिवेशीय ओजोन स्तरों पर नए कणों के निर्माण के अध्ययन पर आधारित है। इस शोध का उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में ओजोन के अलग-अलग स्तरों के प्रभाव में नए कणों के निर्माण की प्रक्रिया को समझना है। अभियान के पहले चरण में डॉ.चिन्मय मलिक भाग लेंगे जबकि दूसरे चरण में डॉ.आलोक सागर गौतम अभियान से जुड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ.आलोक सागर गौतम इससे पहले भी भारतीय अंटार्कटिका अभियान में भाग ले चुके हैं और ध्रुवीय क्षेत्रों में शोध का अनुभव रखते हैं।