प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। विशेष रूप से थलीसैंण विकासखंड में जहां सबसे अधिक गृह प्रसव होते रहे हैं वहां विभाग द्वारा गृह प्रसव को शून्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी थलीसैंण डॉ.खुशबू खत्री ने बताया कि उपकेंद्र बगेली क्षेत्र में एक महिला का प्रसव मई के पहले सप्ताह में होना था लेकिन समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने घर पर ही दाई को बुलाकर प्रसव की तैयारी कर ली थी। इस दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम ने मौके पर पहुंचकर महिला को संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया लेकिन परिवारजन तैयार नहीं हुए। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए 108 एंबुलेंस भेजी गई और फोन पर समझाइश देकर महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबों पहुंचाया गया जहां उसने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। दूसरे मामले में उपकेंद्र डड़ोली में पंजीकृत एक महिला ने विभाग के अभियान से प्रेरित होकर परिवार के विरोध के बावजूद स्वयं पहल की। वह अपनी चार वर्ष की बेटी के साथ प्रसव के लिए उपकेंद्र पहुंची। 108 सेवा को सूचना देने के बाद प्रसव की स्थिति को देखते हुए उसे वहीं रोक लिया गया जहां एएनएम और सीएचओ की टीम ने सफल प्रसव कराते हुए महिला की सुरक्षित डिलीवरी करवाई। इस महिला ने भी एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया और दोनों सुरक्षित हैं।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि अप्रैल माह में थलीसैंण विकासखंड में अब तक 41 प्रसव हुए हैं जिनमें से 40 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लोगों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहां आज भी गृह प्रसव को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार स्वास्थ्य कर्मियों को जागरूकता अभियान के दौरान अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है इसके बावजूद विभाग का लक्ष्य क्षेत्र में शत प्रतिशत सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना है। आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान लगातार चलाया जा रहा है। विशेष रूप से थलीसैंण विकासखंड में जहां सबसे अधिक गृह प्रसव होते रहे हैं वहां विभाग द्वारा गृह प्रसव को शून्य करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी थलीसैंण डॉ.खुशबू खत्री ने बताया कि उपकेंद्र बगेली क्षेत्र में एक महिला का प्रसव मई के पहले सप्ताह में होना था लेकिन समय से पहले प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने घर पर ही दाई को बुलाकर प्रसव की तैयारी कर ली थी। इस दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम ने मौके पर पहुंचकर महिला को संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया लेकिन परिवारजन तैयार नहीं हुए। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए 108 एंबुलेंस भेजी गई और फोन पर समझाइश देकर महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबों पहुंचाया गया जहां उसने स्वस्थ बेटी को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। दूसरे मामले में उपकेंद्र डड़ोली में पंजीकृत एक महिला ने विभाग के अभियान से प्रेरित होकर परिवार के विरोध के बावजूद स्वयं पहल की। वह अपनी चार वर्ष की बेटी के साथ प्रसव के लिए उपकेंद्र पहुंची। 108 सेवा को सूचना देने के बाद प्रसव की स्थिति को देखते हुए उसे वहीं रोक लिया गया जहां एएनएम और सीएचओ की टीम ने सफल प्रसव कराते हुए महिला की सुरक्षित डिलीवरी करवाई। इस महिला ने भी एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया और दोनों सुरक्षित हैं।मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि अप्रैल माह में थलीसैंण विकासखंड में अब तक 41 प्रसव हुए हैं जिनमें से 40 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में लोगों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहां आज भी गृह प्रसव को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार स्वास्थ्य कर्मियों को जागरूकता अभियान के दौरान अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है इसके बावजूद विभाग का लक्ष्य क्षेत्र में शत प्रतिशत सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना है। आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का सहयोग भी लिया जाएगा।