प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल द्वारा 28 और 29 अप्रैल 2026 को प्रोडक्ट मार्केट फिट प्रोटोटाइप और प्रोसेस डिजाइन एवं एमवीपी डेवलपमेंट विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ते हुए उद्यमिता के प्रति जागरूक बनाना था। इसमें 80 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया। कार्यक्रम की शुरुआत में काउंसिल के संयोजक डॉ.भास्करन ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वर्तमान समय में नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष प्रो.एन.गोविंदन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्हें सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का संचालन टिहरी परिसर की डॉ.प्रिया रॉय चौधरी और डॉ.शिवानी उनियाल ने किया। पहले दिन कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ.अंजन कुमार दासगुप्ता ने ड्रोन आधारित पादप वर्गीकरण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मल्टीस्पेक्ट्रल और आरजीबी कैमरों से युक्त ड्रोन के माध्यम से बड़े और दुर्गम क्षेत्रों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल जैसे सीएनएन योलो और विजन ट्रांसफॉर्मर्स की सहायता से पौधों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद पोलैंड के निकोलस कोपरनिकस विश्वविद्यालय की डॉ.वियोरिका रैलेन ने प्रकृति से चिकित्सा तक विषय पर व्याख्यान देते हुए बायोमेडिकल समाधान के लिए बोवाइन संसाधनों के उपयोग और नैनोपार्टिकल आधारित उत्पाद विकास की जानकारी दी। दूसरे दिन बांगाबासी इवनिंग कॉलेज कोलकाता के डॉ.गौर गोपाल सतपति ने शैवाल आधारित उत्पाद और सर्कुलर बायोइकोनॉमी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से बने उत्पादों जैसे कॉस्मेटिक्स नैनो फर्टिलाइजर और कागज आदि पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में 10 छात्रों ने अपने नवाचारी प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए जिनमें हेल्थकेयर बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मॉडल शामिल रहे। अंत में स्टार्टअप गतिविधि समन्वयक डॉ.विनीत कुमार मौर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला के दौरान इंटरएक्टिव सत्रों और केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उत्पाद विकास और नवाचार से जुड़ी जानकारी दी गई। यह पहल विश्वविद्यालय में शोध नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल द्वारा 28 और 29 अप्रैल 2026 को प्रोडक्ट मार्केट फिट प्रोटोटाइप और प्रोसेस डिजाइन एवं एमवीपी डेवलपमेंट विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ते हुए उद्यमिता के प्रति जागरूक बनाना था। इसमें 80 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया। कार्यक्रम की शुरुआत में काउंसिल के संयोजक डॉ.भास्करन ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वर्तमान समय में नवाचार के महत्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष प्रो.एन.गोविंदन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्हें सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का संचालन टिहरी परिसर की डॉ.प्रिया रॉय चौधरी और डॉ.शिवानी उनियाल ने किया। पहले दिन कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ.अंजन कुमार दासगुप्ता ने ड्रोन आधारित पादप वर्गीकरण विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मल्टीस्पेक्ट्रल और आरजीबी कैमरों से युक्त ड्रोन के माध्यम से बड़े और दुर्गम क्षेत्रों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल जैसे सीएनएन योलो और विजन ट्रांसफॉर्मर्स की सहायता से पौधों की पहचान की जा सकती है। इसके बाद पोलैंड के निकोलस कोपरनिकस विश्वविद्यालय की डॉ.वियोरिका रैलेन ने प्रकृति से चिकित्सा तक विषय पर व्याख्यान देते हुए बायोमेडिकल समाधान के लिए बोवाइन संसाधनों के उपयोग और नैनोपार्टिकल आधारित उत्पाद विकास की जानकारी दी। दूसरे दिन बांगाबासी इवनिंग कॉलेज कोलकाता के डॉ.गौर गोपाल सतपति ने शैवाल आधारित उत्पाद और सर्कुलर बायोइकोनॉमी विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से बने उत्पादों जैसे कॉस्मेटिक्स नैनो फर्टिलाइजर और कागज आदि पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में 10 छात्रों ने अपने नवाचारी प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए जिनमें हेल्थकेयर बायोटेक्नोलॉजी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मॉडल शामिल रहे। अंत में स्टार्टअप गतिविधि समन्वयक डॉ.विनीत कुमार मौर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला के दौरान इंटरएक्टिव सत्रों और केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उत्पाद विकास और नवाचार से जुड़ी जानकारी दी गई। यह पहल विश्वविद्यालय में शोध नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुई।