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प्रदीप कुमार
देहरादून-टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने सोमवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में आगामी मानसून सीजन को लेकर राज्य स्तरीय तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में सभी जनपदों और विभिन्न विभागों द्वारा मानसून अवधि में संभावित आपदाओं तथा आपात स्थितियों से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी दी गई। मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड में मानसून अवधि अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण रहती है। एक ओर मानसून का समय होता है तो दूसरी ओर चारधाम यात्रा अपने चरम पर रहती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने सभी विभागों जिला प्रशासन पुलिस एसडीआरएफ एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ 24 घंटे अलर्ट मोड में कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचें और बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में रिस्पांस टाइम सबसे महत्वपूर्ण होता है इसलिए सभी विभाग अपने रिस्पांस मैकेनिज्म को और अधिक प्रभावी और तेज बनाएं। मंत्री ने प्रदेशभर में नालों और नालियों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि मानसून शुरू होने से पहले कम से कम दो बार सफाई हर हाल में सुनिश्चित की जाए ताकि जलभराव और शहरी बाढ़ जैसी स्थितियों को रोका जा सके। उन्होंने संभावित जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए हाई कैपेसिटी पंप मोटर बोट लाइफ जैकेट रेस्क्यू उपकरण और संचार संसाधनों को पूरी तरह कार्यशील अवस्था में रखने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस एसडीआरएफ और एनडीआरएफ को विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा। बैठक में आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला ने सभी जिलाधिकारियों को मानसून अवधि के लिए खाद्यान्न राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेट्रोल डीजल‌ एलपीजी और सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने पर भी जोर दिया ताकि मार्ग बाधित होने या आपदा की स्थिति में लोगों को परेशानी न हो।‌ मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को संवेदनशील और आपदा संभावित क्षेत्रों में मेडिकल पोस्ट स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वहां पर्याप्त संख्या में चिकित्सक पैरामेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जलजनित और संक्रामक रोगों की आशंका को देखते हुए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने को भी कहा गया। पशुपालन विभाग को निर्देश दिए गए कि आपदा की स्थिति में पशुओं के उपचार और बचाव के लिए विशेष क्विक रिस्पांस टीम गठित की जाएं। मंत्री ने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है इसलिए पशुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने मानसून अवधि में प्रसव संभावित गर्भवती महिलाओं का पूर्व डेटा तैयार करने और उनके लिए स्वास्थ्य केंद्र चिन्हित करने के निर्देश दिए ताकि मार्ग बाधित होने की स्थिति में भी समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। बैठक में ट्रेकिंग गतिविधियों को देखते हुए ट्रेकर्स की सुरक्षा के लिए ट्रेकिंग पॉलिसी और विस्तृत एसओपी तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि ट्रेकिंग पर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का पूरा विवरण संबंधित एजेंसियों और यूएसडीएमए के पास उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही ट्रेकर्स के पास जीपीएस और संचार उपकरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। मंत्री मदन कौशिक ने मानसून से पहले नदियों का चैनलाइजेशन और डिसिल्टिंग कार्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदियों में अत्यधिक सिल्ट जमा होने से बाढ़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है। इसलिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें और आवश्यकता पड़ने पर वन मंत्रालय स्तर पर भी समन्वय स्थापित किया जाए। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन आईजी कुमाऊं ऋद्धिम अग्रवाल आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप आईजी फायर सुनील मीणा यूकाडा के सीईओ आशीष चौहान डीजी हेल्थ डॉ.शिखा जंगपांगी मौसम विभाग के निदेशक डॉ.सीएस तोमर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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