प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में अब मेडिको लीगल केस से जुड़ी रिपोर्ट मरीजों और उनके परिजनों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। चिकित्सा कानूनी परीक्षा और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली MedLEaPR-Uttarakhand के तहत यह नई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इससे अब हाथ से लिखी रिपोर्टों की जगह कंप्यूटरीकृत और स्पष्ट डिजिटल रिपोर्ट मिलेगी। बेस अस्पताल प्रदेश का पहला राजकीय अस्पताल बन गया है जहां जनता की सुविधा के लिए इस प्रकार की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। अस्पताल में प्रतिदिन सड़क दुर्घटना मारपीट जानवरों के हमले विषाक्त पदार्थ सेवन पानी में डूबने और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े कई मामले आते हैं। ऐसे मामलों में एमएलसी रिपोर्ट इलाज के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उपयोग की जाती है। अब तक डॉक्टरों को एमएलसी रजिस्टर में रिपोर्ट हाथ से दर्ज करनी पड़ती थी लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से पूरी प्रक्रिया अधिक तेज पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी।
नई प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पीजी कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने अपलोड करने और सुरक्षित तरीके से साझा करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही न्यायिक मामलों में संबंधित पक्षों को समय पर डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.वल्लियप्पन और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की देखरेख में इस नई व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार डिजिटल प्रणाली लागू होने से फॉरेंसिक प्रक्रिया अधिक आधुनिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी जिससे मरीजों और जांच एजेंसियों दोनों को सुविधा मिलेगी।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में अब मेडिको लीगल केस से जुड़ी रिपोर्ट मरीजों और उनके परिजनों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। चिकित्सा कानूनी परीक्षा और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली MedLEaPR-Uttarakhand के तहत यह नई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इससे अब हाथ से लिखी रिपोर्टों की जगह कंप्यूटरीकृत और स्पष्ट डिजिटल रिपोर्ट मिलेगी। बेस अस्पताल प्रदेश का पहला राजकीय अस्पताल बन गया है जहां जनता की सुविधा के लिए इस प्रकार की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है। अस्पताल में प्रतिदिन सड़क दुर्घटना मारपीट जानवरों के हमले विषाक्त पदार्थ सेवन पानी में डूबने और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े कई मामले आते हैं। ऐसे मामलों में एमएलसी रिपोर्ट इलाज के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उपयोग की जाती है। अब तक डॉक्टरों को एमएलसी रजिस्टर में रिपोर्ट हाथ से दर्ज करनी पड़ती थी लेकिन नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से पूरी प्रक्रिया अधिक तेज पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी।
नई प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पीजी कर रहे जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एमएलसी रिपोर्ट तैयार करने अपलोड करने और सुरक्षित तरीके से साझा करने की प्रक्रिया सिखाई जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यप्रणाली अधिक व्यवस्थित होगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही न्यायिक मामलों में संबंधित पक्षों को समय पर डिजिटल दस्तावेज उपलब्ध हो सकेंगे। फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.वल्लियप्पन और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की देखरेख में इस नई व्यवस्था को संचालित किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार डिजिटल प्रणाली लागू होने से फॉरेंसिक प्रक्रिया अधिक आधुनिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी जिससे मरीजों और जांच एजेंसियों दोनों को सुविधा मिलेगी।