प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एसटीईएमआई प्रोग्राम जीवन रक्षक साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यात्रा मार्गों पर विशेष चिकित्सा व्यवस्थाएं की गई हैं। जनपद चमोली में बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर 14 स्थानों पर ईसीजी जांच और थ्रोम्बोलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इनमें बदरीनाथ धाम एमआरपी जोशीमठ गडोरा मंडल लंगासू गौचर गोविंदघाट और पीएचसी गौचर सहित कई केंद्र शामिल हैं। गंभीर हृदय रोगियों के उपचार के लिए जोशीमठ गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में थ्रोम्बोलिसिस सेंटर स्थापित किए गए हैं। अब तक 148 तीर्थयात्रियों की जांच की जा चुकी है जिनमें 5 यात्रियों की स्थिति गंभीर पाई गई। इन सभी का तत्काल उपचार किया गया जबकि एक मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद बदरीनाथ धाम से हेली एम्बुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। इसके अलावा 47 असामान्य मामलों में यात्रियों को उपचार और निरंतर निगरानी में रखा गया है। एसीएमओ डॉ.वैष्णव कृष्णा ने बताया कि एसटीईएमआई केंद्रों पर आईपैड युक्त डिजिटल ईसीजी मशीनें स्थापित की गई हैं, जिससे जांच रिपोर्ट तुरंत संबंधित चिकित्सालयों और स्वास्थ्य निदेशालय तक पहुंच रही है। इससे समय पर उपचार संभव हो रहा है और मरीजों की जान बचाई जा रही है। एसटीईएमआई अर्थात एसटी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन एक गंभीर हृदयाघात है जिसमें हृदय की कोरोनरी धमनी पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है और रक्त प्रवाह रुक जाता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।थ्रोम्बोलिसिस थेरेपी एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें रक्त वाहिकाओं में बने थक्कों को दवाओं के माध्यम से घोलकर सामान्य रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है जिसे क्लॉट बस्टर थेरेपी भी कहा जाता है।
Spread the love
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा को सुदृढ़ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एसटीईएमआई प्रोग्राम जीवन रक्षक साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यात्रा मार्गों पर विशेष चिकित्सा व्यवस्थाएं की गई हैं। जनपद चमोली में बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर 14 स्थानों पर ईसीजी जांच और थ्रोम्बोलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इनमें बदरीनाथ धाम एमआरपी जोशीमठ गडोरा मंडल लंगासू गौचर गोविंदघाट और पीएचसी गौचर सहित कई केंद्र शामिल हैं। गंभीर हृदय रोगियों के उपचार के लिए जोशीमठ गोपेश्वर और कर्णप्रयाग में थ्रोम्बोलिसिस सेंटर स्थापित किए गए हैं। अब तक 148 तीर्थयात्रियों की जांच की जा चुकी है जिनमें 5 यात्रियों की स्थिति गंभीर पाई गई। इन सभी का तत्काल उपचार किया गया जबकि एक मरीज को प्राथमिक उपचार के बाद बदरीनाथ धाम से हेली एम्बुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। इसके अलावा 47 असामान्य मामलों में यात्रियों को उपचार और निरंतर निगरानी में रखा गया है। एसीएमओ डॉ.वैष्णव कृष्णा ने बताया कि एसटीईएमआई केंद्रों पर आईपैड युक्त डिजिटल ईसीजी मशीनें स्थापित की गई हैं, जिससे जांच रिपोर्ट तुरंत संबंधित चिकित्सालयों और स्वास्थ्य निदेशालय तक पहुंच रही है। इससे समय पर उपचार संभव हो रहा है और मरीजों की जान बचाई जा रही है। एसटीईएमआई अर्थात एसटी सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन एक गंभीर हृदयाघात है जिसमें हृदय की कोरोनरी धमनी पूरी तरह अवरुद्ध हो जाती है और रक्त प्रवाह रुक जाता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।थ्रोम्बोलिसिस थेरेपी एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें रक्त वाहिकाओं में बने थक्कों को दवाओं के माध्यम से घोलकर सामान्य रक्त प्रवाह बहाल किया जाता है जिसे क्लॉट बस्टर थेरेपी भी कहा जाता है।