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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। भरोषी देवी नामक 65 वर्षीय महिला लंबे समय से कमर के निचले हिस्से में दर्द एवं जकड़न की समस्या से परेशान थीं। उन्हें बैठने पर दर्द अधिक बढ़ जाता था और यह समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। जिला अस्पताल बौराड़ी नई टिहरी में स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श के दौरान उन्हें कोक्सीडीनिया रोग पाया गया। चिकित्साधिकारी डॉ.विनोद रावत ने बताया कि आयुर्वेद में गुदास्थि के दर्द को वात दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है जिससे रीढ़ के निचले हिस्से में अकड़न और पीड़ा उत्पन्न होती है। कोक्सिक्स या टेल बोन रीढ़ की सबसे निचली हड्डी होती है जिसमें दर्द होने पर बैठने में अधिक तकलीफ होती है और यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है। डॉ.विनोद रावत ने बताया कि कोक्सीडीनिया रोग दो प्रकार से उत्पन्न हो सकता है। पहला बिना किसी चोट के टेल बोन के असामान्य कोण के कारण जिससे कठोर सतह पर बैठने पर दर्द बढ़ जाता है। दूसरा फिसलने या गिरने जैसी चोट के कारण टेल बोन में सूजन आने से तेज दर्द उत्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त अन्य कारण भी हो सकते हैं। भरोषी देवी का उपचार आयुर्वेद अस्पताल नई टिहरी में किया गया। उपचार के अंतर्गत पंचकर्म सहायक विकास बिजल्वाण द्वारा आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म थेरेपी योग आसन एवं स्ट्रेचिंग व्यायाम कराए गए। साथ ही बैठने की मुद्रा में सुधार सिटिंग कुशन के उपयोग तथा जीवनशैली में आवश्यक बदलाव की सलाह दी गई। उपचार के बाद रोगी ने अपने लक्षणों में राहत महसूस की और अब पहले की तुलना में काफी आराम है।चिकित्साधिकारी डॉ.विनोद रावत के अनुसार आयुर्वेदिक चिकित्सा पंचकर्म थेरेपी योग एवं जीवनशैली में सुधार के माध्यम से कोक्सीडीनिया कमर और रीढ़ के दर्द स्पॉन्डिलाइटिस साइटिका गठिया जोड़ों के दर्द मांसपेशियों के तनाव एवं अकड़न जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके साथ ही पाचन संबंधी समस्याओं में भी सुधार होता है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.सुभाष चंद ने बताया कि कोक्सीडीनिया से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सालय से संपर्क किया जा सकता है।

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