प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी एवं आसपास के गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ मेला नियंत्रण भवन स्थित केंद्रीयकृत नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया तथा सीसीआर टावर से विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही भीड़ के दबाव और यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया। मेलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ मेला नियंत्रण भवन के टावर से हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर स्नान के लिए उमड़ी भीड़ का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने स्थापित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष का भी अवलोकन कर सीसीटीवी नेटवर्क भीड़ निगरानी प्रणाली यातायात नियंत्रण तंत्र और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील स्थलों पर भीड़ के घनत्व श्रद्धालुओं की आवाजाही के रुझान और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता से संबंधित जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने कहा कि हरिद्वार में आयोजित होने वाले प्रमुख स्नान पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं बल्कि आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर हैं। इन अवसरों पर वास्तविक परिस्थितियों में व्यवस्थाओं की कार्यक्षमता का परीक्षण किया जा रहा है जिससे भविष्य की चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाकर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन स्नान पर्वों के दौरान प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों का व्यवस्थित विश्लेषण कर रहा है। विशेष रूप से यह अध्ययन किया जा रहा है कि किस समय और किस स्थान पर सर्वाधिक भीड़ का दबाव बनता है श्रद्धालुओं की आवाजाही के प्रमुख मार्ग कौन से हैं आपातकालीन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया समय कितना है तथा यातायात संचालन को और अधिक सुगम कैसे बनाया जा सकता है। सोनिका ने बताया कि आगामी कुंभ मेले के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली रियल टाइम क्राउड एनालिटिक्स बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वित संचालन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक बड़े स्नान पर्व से प्राप्त फीडबैक को योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला विश्व के सबसे विराट आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है। कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुगम आवागमन और निर्बाध व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना मेला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मेला प्रशासन सभी व्यवस्थाओं और तैयारियों की निरंतर समीक्षा एवं मूल्यांकन कर रहा है तथा हाल के स्नान पर्वों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर अपनी कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बना रहा है ताकि आगामी कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इस अवसर पर अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती अपर पुलिस अधीक्षक (संचार) विपिन कुमार सहित मेला प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी एवं आसपास के गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ मेला नियंत्रण भवन स्थित केंद्रीयकृत नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया तथा सीसीआर टावर से विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही भीड़ के दबाव और यातायात संचालन की स्थिति का जायजा लिया। मेलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ मेला नियंत्रण भवन के टावर से हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों पर स्नान के लिए उमड़ी भीड़ का निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने स्थापित केंद्रीय नियंत्रण कक्ष का भी अवलोकन कर सीसीटीवी नेटवर्क भीड़ निगरानी प्रणाली यातायात नियंत्रण तंत्र और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से संवेदनशील स्थलों पर भीड़ के घनत्व श्रद्धालुओं की आवाजाही के रुझान और व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता से संबंधित जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने कहा कि हरिद्वार में आयोजित होने वाले प्रमुख स्नान पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं बल्कि आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण अवसर हैं। इन अवसरों पर वास्तविक परिस्थितियों में व्यवस्थाओं की कार्यक्षमता का परीक्षण किया जा रहा है जिससे भविष्य की चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाकर प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन स्नान पर्वों के दौरान प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों का व्यवस्थित विश्लेषण कर रहा है। विशेष रूप से यह अध्ययन किया जा रहा है कि किस समय और किस स्थान पर सर्वाधिक भीड़ का दबाव बनता है श्रद्धालुओं की आवाजाही के प्रमुख मार्ग कौन से हैं आपातकालीन परिस्थितियों में प्रतिक्रिया समय कितना है तथा यातायात संचालन को और अधिक सुगम कैसे बनाया जा सकता है। सोनिका ने बताया कि आगामी कुंभ मेले के लिए तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली रियल टाइम क्राउड एनालिटिक्स बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वित संचालन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक बड़े स्नान पर्व से प्राप्त फीडबैक को योजनाओं में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला विश्व के सबसे विराट आध्यात्मिक आयोजनों में से एक है। कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुगम आवागमन और निर्बाध व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना मेला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से मेला प्रशासन सभी व्यवस्थाओं और तैयारियों की निरंतर समीक्षा एवं मूल्यांकन कर रहा है तथा हाल के स्नान पर्वों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर अपनी कार्ययोजना को और अधिक प्रभावी बना रहा है ताकि आगामी कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इस अवसर पर अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती अपर पुलिस अधीक्षक (संचार) विपिन कुमार सहित मेला प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।