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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में जनपद में निर्माणाधीन सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के मानकों के अनुपालन तथा सीवर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सहायक अभियंता निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा ऋषिकेश ने बताया कि ढालवाला ऋषिकेश में निर्माणाधीन 8 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और वर्तमान में संयंत्र का परीक्षण संचालन किया जा रहा है। इसके जुलाई माह के प्रथम सप्ताह तक पूर्ण रूप से संचालित होने की संभावना है। वहीं ढालवाला में ही निर्माणाधीन 300 केएलडी क्षमता के दूसरे सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 30 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अधिशासी अभियंता पेयजल निगम मुनिकीरेती ने बताया कि नरेंद्रनगर में निर्माणाधीन 2 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। सीवेज पम्पिंग स्टेशन को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है तथा स्वीकृति के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की को प्रस्ताव भेजा गया है। बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के अनुरूप सीवेज शोधन संयंत्रों के संचालन की भी समीक्षा की गई। स्थलीय निरीक्षण के दौरान कुछ अनियमितताएं पाए जाने और मानकों के अनुरूप संचालन न होने पर जिलाधिकारी ने पूर्व में उत्तराखण्ड जल संस्थान की गंगा इकाई को संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई और कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में तपोवन में संचालित 3.5 एमएलडी क्षमता के सीवेज शोधन संयंत्र का संचालन कर रही फर्म पर 6 लाख 16 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। जिलाधिकारी ने उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद में संचालित ऐसे सभी होटल और संस्थानों का विवरण उपलब्ध कराया जाए जिनमें 20 से अधिक कमरे हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के मानकों के अनुसार उनके यहां सीवेज शोधन संयंत्र स्थापित हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र होटल एवं संस्थानों में सीवेज शोधन संयंत्र की स्थापना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। बैठक में उत्तराखण्ड जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों को विभागीय निःशुल्क सहायता दूरभाष संख्या का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए गए ताकि आमजन को सीवर और पेयजल संयोजन से संबंधित जानकारी आसानी से मिल सके। इस दौरान अधिशासी अभियंता उत्तराखण्ड जल संस्थान ने बताया कि विभाग का टोल फ्री नंबर 1800-180-4100 है जिस पर संपर्क कर नागरिक अपनी शिकायतों एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। बैठक में जल निगम के अधीक्षण अभियंता वी.के.जैन जल संस्थान के अधिशासी अभियंता प्रशांत भारद्वाज अरुण उनियाल प्रवीन सहित अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े रहे।

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