प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद चमोली के विकासखंड देवाल के ग्राम खजडकोट निवासी किरन देवी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से उन्होंने अपना सिलाई केंद्र स्थापित कर न केवल स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता हासिल की है बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ रही हैं। किरन देवी एक सामान्य कृषक परिवार से हैं जहां परिवार की आजीविका का मुख्य आधार कृषि और पशुपालन था। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं तथा बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करना कठिन हो रहा था। इंटरमीडिएट तक शिक्षित किरन देवी को बचपन से ही सिलाई-कढ़ाई में विशेष रुचि थी लेकिन संसाधनों के अभाव में वे अपनी प्रतिभा को व्यवसाय का रूप नहीं दे पा रही थीं। वर्ष 2023-24 में सुनन्दा सीएलएफ एवं स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होने के कारण उनका चयन रीप परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम के लिए हुआ। एक लाख रुपये की लागत से स्थापित इस उद्यम में 30 हजार रुपये की सहायता रीप परियोजना से 60 हजार रुपये का बैंक ऋण तथा शेष राशि स्वयं के अंशदान के रूप में निवेश की गई। परियोजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से उन्होंने दो सिलाई मशीनें एक पिको मशीन तथा अन्य आवश्यक उपकरण खरीदकर अपना सिलाई केंद्र स्थापित किया। वर्तमान में वे आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए सिलाई एवं वस्त्र निर्माण का कार्य कर रही हैं। साथ ही इच्छुक महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। आज उनका सिलाई केंद्र प्रतिमाह 9 हजार से 10 हजार रुपये तक की आय का सशक्त माध्यम बन चुका है। इस आय से वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी सुचारु रूप से वहन कर रही हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी और प्रशिक्षक के रूप में स्थापित हो चुकी है। किरन देवी की सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले तो वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद चमोली के विकासखंड देवाल के ग्राम खजडकोट निवासी किरन देवी आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से उन्होंने अपना सिलाई केंद्र स्थापित कर न केवल स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता हासिल की है बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और प्रशिक्षण से जोड़ रही हैं। किरन देवी एक सामान्य कृषक परिवार से हैं जहां परिवार की आजीविका का मुख्य आधार कृषि और पशुपालन था। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं तथा बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करना कठिन हो रहा था। इंटरमीडिएट तक शिक्षित किरन देवी को बचपन से ही सिलाई-कढ़ाई में विशेष रुचि थी लेकिन संसाधनों के अभाव में वे अपनी प्रतिभा को व्यवसाय का रूप नहीं दे पा रही थीं। वर्ष 2023-24 में सुनन्दा सीएलएफ एवं स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होने के कारण उनका चयन रीप परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम के लिए हुआ। एक लाख रुपये की लागत से स्थापित इस उद्यम में 30 हजार रुपये की सहायता रीप परियोजना से 60 हजार रुपये का बैंक ऋण तथा शेष राशि स्वयं के अंशदान के रूप में निवेश की गई। परियोजना से प्राप्त सहयोग के माध्यम से उन्होंने दो सिलाई मशीनें एक पिको मशीन तथा अन्य आवश्यक उपकरण खरीदकर अपना सिलाई केंद्र स्थापित किया। वर्तमान में वे आसपास के गांवों की महिलाओं के लिए सिलाई एवं वस्त्र निर्माण का कार्य कर रही हैं। साथ ही इच्छुक महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं। आज उनका सिलाई केंद्र प्रतिमाह 9 हजार से 10 हजार रुपये तक की आय का सशक्त माध्यम बन चुका है। इस आय से वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी सुचारु रूप से वहन कर रही हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी और प्रशिक्षक के रूप में स्थापित हो चुकी है। किरन देवी की सफलता यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले तो वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती हैं बल्कि समाज की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।