प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी के न्यायालय ने स्टाम्प शुल्क अपवंचन से जुड़े चार मामलों का निस्तारण करते हुए संबंधित पक्षों पर कुल 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। न्यायालय के इस निर्णय को स्टाम्प शुल्क चोरी के मामलों में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय ग्राम तपोवन टिहरी गढ़वाल स्थित भूमि को खाली भूमि दर्शाकर पंजीकरण कराया गया था जबकि स्थानीय निरीक्षण में संबंधित भूमि पर सात मंजिला फ्लैट निर्मित पाए गए। इस आधार पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा-47ए के तहत इसे स्टाम्प शुल्क की अपवंचना माना गया। न्यायालय ने प्रत्येक मामले में स्टाम्प शुल्क के साथ विक्रय विलेख निष्पादन की तिथि से निर्णय की तिथि तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से अधिभार जोड़ते हुए 47 लाख 49 हजार 960 रुपये की शास्ति अधिरोपित की। चारों प्रकरण क्रमशः अंकित भाटिया नितेश कुमार पंकज शर्मा तथा नितेश कुमार एवं अंकित भाटिया से संबंधित हैं। इन सभी मामलों में विक्रय विलेख पंजीकरण के दौरान स्टाम्प शुल्क की अपवंचना पाई गई। चारों मामलों में न्यायालय द्वारा कुल 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है।
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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी के न्यायालय ने स्टाम्प शुल्क अपवंचन से जुड़े चार मामलों का निस्तारण करते हुए संबंधित पक्षों पर कुल 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। न्यायालय के इस निर्णय को स्टाम्प शुल्क चोरी के मामलों में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि विक्रय विलेख के पंजीकरण के समय ग्राम तपोवन टिहरी गढ़वाल स्थित भूमि को खाली भूमि दर्शाकर पंजीकरण कराया गया था जबकि स्थानीय निरीक्षण में संबंधित भूमि पर सात मंजिला फ्लैट निर्मित पाए गए। इस आधार पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 की धारा-47ए के तहत इसे स्टाम्प शुल्क की अपवंचना माना गया। न्यायालय ने प्रत्येक मामले में स्टाम्प शुल्क के साथ विक्रय विलेख निष्पादन की तिथि से निर्णय की तिथि तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से अधिभार जोड़ते हुए 47 लाख 49 हजार 960 रुपये की शास्ति अधिरोपित की। चारों प्रकरण क्रमशः अंकित भाटिया नितेश कुमार पंकज शर्मा तथा नितेश कुमार एवं अंकित भाटिया से संबंधित हैं। इन सभी मामलों में विक्रय विलेख पंजीकरण के दौरान स्टाम्प शुल्क की अपवंचना पाई गई। चारों मामलों में न्यायालय द्वारा कुल 1 करोड़ 89 लाख 99 हजार 840 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है।