प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला न्यायालय परिसर में मंगलवार को सामुदायिक मध्यस्थता (मुकदमेबाजी मुक्त ग्रामीण भारत की ओर परियोजना) के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाज़िश कलीम के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का आपसी संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना मुकदमेबाजी की प्रवृत्ति को कम करना तथा आमजन को सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम में जनपद के चयनित ग्रामों से नामित सामुदायिक मध्यस्थों तथा पराविधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सामुदायिक मध्यस्थता की भूमिका, महत्व एवं व्यवहारिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि ग्राम स्तर पर आपसी समझ संवाद और सहयोग के माध्यम से अनेक विवादों का समाधान न्यायालय पहुंचे बिना भी किया जा सकता है। प्रशिक्षण सत्र में मध्यस्थता के मूल सिद्धांत प्रभावी संवाद एवं संचार कौशल विवादों के विश्लेषण की प्रक्रिया गोपनीयता एवं मध्यस्थता की नैतिकता लैंगिक संवेदनशीलता शक्ति असंतुलन के प्रबंधन तथा समझौता प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही रोल प्ले एवं व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को ग्राम स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जयदर्शन बिष्ट आमोद नैथानी तथा राजकुमार बत्रा ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मध्यस्थता की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित सामुदायिक मध्यस्थों एवं पराविधिक स्वयंसेवकों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को मध्यस्थता की उपयोगिता के प्रति जागरूक करें तथा आपसी विवादों का निष्पक्ष शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सभी प्रतिभागियों से ग्रामीण स्तर पर न्याय सुलभ बनाने की दिशा में प्रभावी योगदान देने का आह्वान भी किया गया।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला न्यायालय परिसर में मंगलवार को सामुदायिक मध्यस्थता (मुकदमेबाजी मुक्त ग्रामीण भारत की ओर परियोजना) के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) नाज़िश कलीम के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे विवादों का आपसी संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण समाधान सुनिश्चित करना मुकदमेबाजी की प्रवृत्ति को कम करना तथा आमजन को सुलभ एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना रहा। कार्यक्रम में जनपद के चयनित ग्रामों से नामित सामुदायिक मध्यस्थों तथा पराविधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सामुदायिक मध्यस्थता की भूमिका, महत्व एवं व्यवहारिक उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि ग्राम स्तर पर आपसी समझ संवाद और सहयोग के माध्यम से अनेक विवादों का समाधान न्यायालय पहुंचे बिना भी किया जा सकता है। प्रशिक्षण सत्र में मध्यस्थता के मूल सिद्धांत प्रभावी संवाद एवं संचार कौशल विवादों के विश्लेषण की प्रक्रिया गोपनीयता एवं मध्यस्थता की नैतिकता लैंगिक संवेदनशीलता शक्ति असंतुलन के प्रबंधन तथा समझौता प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही रोल प्ले एवं व्यवहारिक अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को ग्राम स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जयदर्शन बिष्ट आमोद नैथानी तथा राजकुमार बत्रा ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मध्यस्थता की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए कहा कि सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ कम करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित सामुदायिक मध्यस्थों एवं पराविधिक स्वयंसेवकों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को मध्यस्थता की उपयोगिता के प्रति जागरूक करें तथा आपसी विवादों का निष्पक्ष शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सभी प्रतिभागियों से ग्रामीण स्तर पर न्याय सुलभ बनाने की दिशा में प्रभावी योगदान देने का आह्वान भी किया गया।