प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दीर्घकालिक दिशा तय करने के उद्देश्य से मंगलवार 22 सितंबर 2026 को होटल रमाडा चकराता रोड देहरादून में उत्तराखंड सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गुड गवर्नेंस और एसआरएडीएसटीए के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव संकल्प विकसित उत्तराखंड 2047 का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में एमडीडीए उत्तराखंड पर्यटन एचआरडीए ब्रिडकुल एवं आईटीडीए ने सक्रिय रूप से भागीदारी की। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रमुख सचिव नियोजन डॉ.आर.मीनाक्षी सुंदरम ने पूर्व रक्षा सचिव भारत सरकार योगेंद्र नारायण पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड एन. रविशंकर सेवानिवृत्त आईएएस डॉ.संजीव चोपड़ा तथा सचिवों एवं विभागाध्यक्षों का स्वागत किया। कॉन्क्लेव में उत्तराखंड के समावेशी सतत, सुदृढ़ एवं समृद्ध विकास की दीर्घकालिक दिशा तय करने के उद्देश्य से विकसित उत्तराखंड 2047 तथा राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श किया। कॉन्क्लेव में हुए मंथन के आधार पर राज्य का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा। कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए प्रमुख सचिव नियोजन डॉ.आर.मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि इसमें राज्य की वर्तमान स्थिति क्षमताओं चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप उत्तराखंड को एक विकसित राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि विकसित की कोई मानक परिभाषा नहीं है लेकिन सामान्य समझ के अनुसार विकसित का अर्थ अधिक औसत आय मजबूत अर्थव्यवस्था और नागरिकों के जीवन की उच्च गुणवत्ता है। विकसित उत्तराखंड के विजन को प्राप्त करने के लिए जनसांख्यिकीय लाभांश का उपयोग राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद में प्राथमिक क्षेत्र का प्रतिशत बढ़ाना, छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्रदान करना और कार्यबल को अर्थव्यवस्था के सीमांत क्षेत्रों में रोजगार योग्य बनाना आवश्यक है। उन्होंने पहाड़ों के विकास कम मूल्य वाली कृषि को उच्च मूल्य बाजार आधारित निर्यात आधारित और प्रसंस्करण आधारित कृषि में बदलने शहरीकरण को बढ़ावा देने तथा सामाजिक क्षेत्र में भी अधिक कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक क्षेत्र के कार्यबल को विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में लगाने की दिशा में भी काम करना होगा। पूर्व रक्षा सचिव भारत सरकार डॉ.योगेंद्र नारायण ने ऑनलाइन माध्यम से अपने विचार साझा किए। उन्होंने उत्तराखंड की विरासत संरक्षण पर्यटन शिक्षा और सामाजिक जवाबदेही पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास की रणनीति में विरासत और सांस्कृतिक संरक्षण को राज्य की विकास योजना का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए जिससे सांस्कृतिक संसाधनों को एकीकृत किया जा सके। विरासत व्यवसायों को संवेदनशील तरीके से अनुकूलित किया जाना चाहिए जिसमें होटलों और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि संरक्षित ऐतिहासिक क्षेत्रों को पर्यटन रोजगार और स्थानीय व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करने वाली आर्थिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी राज्य की योजना की मुख्य ताकत उसकी पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत को एकीकृत करने में निहित है। डॉ.योगेंद्र नारायण ने जल निकायों को सामुदायिक स्थानों के रूप में बहाल करने और जैव विविधता पार्कों को जोड़ने वाले हरित गलियारे बनाने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक आवासों को संस्कृति और वाणिज्य के साथ जीवंत रखना विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार के तहत सभी स्नातकोत्तर छात्रों को इंटर्नशिप कार्यक्रमों में शामिल करने की आवश्यकता बताई जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी हो सके। उन्होंने होमस्टे कार्यक्रमों को अधिक क्षेत्रों तक विस्तार देने की रणनीति अपनाने पर जोर दिया जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। गांवों को मजबूत करने के लिए भारी परिवहन प्रणालियों के बजाय रोपवे जैसे आधुनिक परिवहन साधनों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि विकास का अंतिम लक्ष्य केवल सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाना नहीं बल्कि लोगों की खुशी होना चाहिए। राज्यों को राष्ट्रीय खुशी को मापने के लिए रणनीतियां और नीतियां विकसित करनी चाहिए तथा इसे उत्तराखंड राज्य द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों में शामिल किया जाना चाहिए। पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड एन.रविशंकर ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। उन्होंने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न जनपदों की पंचायतों और नगर पंचायतों के साथ किए गए कार्यों के अनुभव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखंड के लिए स्थानीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों को सशक्त करने की आवश्यकता है। प्रशासनिक सुधार के संबंध में उन्होंने कई विभागों के एकीकरण का सुझाव दिया जिससे अंतर-विभागीय समन्वय को और मजबूत किया जा सके तथा सभी विभाग शासन का प्रतिनिधित्व कर सकें। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर जिला योजना समिति बनाने का सुझाव दिया। इसके साथ ही मुख्य विकास अधिकारी को जिला पंचायत का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाए जाने का सुझाव दिया जिससे जनपद स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से विकास किया जा सके। कॉन्क्लेव में विभिन्न विषयों पर तीन प्रमुख सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में विकसित उत्तराखंड 2047 के लिए बुनियादी ढांचे संपर्क आपदा सहनशीलता और आर्थिक विकास पर चर्चा हुई। इसमें पर्वतीय सड़कों एवं सुरंगों शहरी विकास आवास नवीकरणीय ऊर्जा रोपवे बहु-मॉडल परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। दूसरे सत्र में जलवायु अनुकूल कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के माध्यम से उच्च मूल्य और बाजार आधारित विकास पर चर्चा हुई। इसमें जलवायु-स्मार्ट कृषि एवं बागवानी उच्च मूल्य वाली फसल विविधीकरण किसान उत्पादक संगठन औषधीय एवं सुगंधित पौधों की मूल्य श्रृंखला बाजार संपर्क ग्रामीण उद्यम तथा युवाओं एवं महिलाओं के लिए आजीविका के अवसरों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। तीसरे सत्र में भविष्य के लिए तैयार उत्तराखंड के विषय पर स्टार्टअप नवाचार तकनीक और कौशल विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसमें स्टार्टअप एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र हिमालयी चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीकी नवाचार कौशल विकास ग्रामीण उद्यमिता तथा महिलाओं और युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने पर विचार किया गया। कॉन्क्लेव में पूर्व मुख्य सचिव एन.रविशंकर पूर्व निदेशक लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी डॉ.संजीव चोपड़ा सेतु आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह प्रमुख सचिव नियोजन डॉ.आर.मीनाक्षी सुंदरम लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ.पंकज कुमार पाण्डे पंचायती राज सचिव चन्द्रेश यादव आवास सचिव डॉ.आर.राजेश कुमार कार्यक्रम क्रियान्वयन सचिव दीपक कुमार अपर सचिव नियोजन नरेंद्र भंडारी सूचना महानिदेशक बंसीधर तिवारी आईटीडीए निदेशक आलोक पाण्डेय नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ.लक्ष्मीकांत आईआईआरएस के निदेशक डॉ.आरपी सिंह कैप के निदेशक डॉ.निपेंद्र चौहान आईआईएम काशीपुर के प्रो. सफल बत्रा सीआईआई की अध्यक्ष सोनिया गर्ग हेरिटेज एविएशन के रोहित माथुर एपीडा के सलाहकार एवं पूर्व बागवानी निदेशक डॉ.बीएस नेगी बेफ के निदेशक सहित अन्य विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अपने विचार रखे तथा विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सुझाव दिए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण अपर सचिव नियोजन नरेंद्र भंडारी ने दिया। कार्यक्रम का विवरण एसआरएडीएसटीए के अध्यक्ष डॉ.कुँवर राज अस्थाना ने प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीपीपीजीजी डॉ.मनोज कुमार पंत ने किया। कार्यक्रम के समापन समारोह में उल्लेखनीय कार्य करने वाले महानुभावों को पांचवें आईजीएसआई उत्तराखंड रतनश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में राज्य बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ.गीता खन्ना एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ.भानु दुग्गल उत्तरांचल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.धर्म बुद्धि जीआरडी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनीष प्रतीक उजवनल के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह मायादेवी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ.तृप्ति सेमवाल फिल्म विकास परिषद के एसीईओ केएस चौहान एसटीपीआई के अपर निदेशक मनीष कुमार तथा सूचना विभाग के उपनिदेशक बद्री चंद नेगी शामिल रहे। सम्मान प्रमुख सचिव डॉ.आर.मीनाक्षी सुंदरम डॉ.अजय सक्सेना एवं चिन्मय मिशन की सचिव साधना जयराज द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किए गए।
