प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश के कृषि एवं जनपद टिहरी के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी ने गुरुवार को हरेला पर्व के पावन अवसर पर जौनपुर क्षेत्र के ग्राम परोगी में आयोजित “हर गांव का यही पैगाम एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ पौधे लगाकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति प्रकृति के प्रति आस्था और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पर्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान लोगों को अपनी मातृशक्ति और प्रकृति दोनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का उल्लेख करते हुए सभी से अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल भी मां की तरह करने की अपील की ताकि वह स्वस्थ रूप से विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वृक्ष न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि जल संरक्षण जैव विविधता स्वच्छ वायु और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी हरियाली जल स्रोतों और प्राकृतिक संपदा से है। यदि सभी लोग मिलकर पौधारोपण और उनके संरक्षण का संकल्प लें तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और समृद्ध पर्यावरण दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं महिलाओं स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का आह्वान किया। गणेश जोशी ने कहा कि हरेला केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि बच्चों में भी पर्यावरण संरक्षण के संस्कार विकसित किए जाने चाहिए ताकि वे प्रकृति के महत्व को समझें और उसकी रक्षा के लिए आगे आएं। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
