प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम के अंतर्गत 20 जुलाई से 1 अगस्त 2026 तक ‘भारतीय भाषाओं की समरसता एवं बहुलता का स्वरूप’ विषय पर दो सप्ताह का राष्ट्रीय ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित शिक्षाविद भाषाविद और साहित्यकार भारतीय भाषाओं के विविध आयामों पर व्याख्यान देंगे। विश्वविद्यालय ने इस कार्यक्रम के लिए कोई पंजीकरण शुल्क निर्धारित नहीं किया है। यह रिफ्रेशर कोर्स विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के संरक्षण में तथा एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी और कार्यक्रम समन्वयक हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की आचार्य प्रो.गुड्डी बिष्ट पंवार के मार्गदर्शन में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम समन्वयक प्रो.गुड्डी बिष्ट पंवार ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप इस रिफ्रेशर कोर्स का उद्देश्य भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा उनकी समरसता बहुलता पारस्परिक संबंध भारतीय ज्ञान परंपरा तथा भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय एकता में उनकी भूमिका पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान भारतीय भाषाओं के साहित्यिक वैविध्य भारतीय साहित्य एवं भारत-बोध हिमालयी क्षेत्र की भाषाएं और उनका साहित्य भारतीय भाषाओं के अंतर्संबंध संस्कृति के संरक्षण में भारतीय भाषाओं की भूमिका पूर्वोत्तर भारत की भाषाएं एवं साहित्य तथा भारतीय बोलियों के साहित्य में जीवन मूल्यों जैसे विषयों पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से जुड़े ख्यातिप्राप्त विद्वानों एवं साहित्यकारों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। यह ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगा। कार्यक्रम पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा जिससे देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक आसानी से इसमें सहभागिता कर सकेंगे। सभी सत्रों में नियमित उपस्थिति दर्ज कराने तथा मूल्यांकन परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले प्रतिभागियों को यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा जो कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के लिए मान्य होगा। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि भारतीय भाषाओं पर आधारित यह अपने प्रकार का पहला पुनश्चर्या पाठ्यक्रम होगा जो भारत की सामासिक संस्कृति को भाषाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता का सशक्त सेतु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय भाषाओं की बहुलतापूर्ण परंपरा सांस्कृतिक विरासत और समकालीन प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद का मंच प्रदान करेगा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा भाषायी विविधता और राष्ट्रीय एकात्मता के विमर्श को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि अभी तक इस पाठ्यक्रम के लिए देशभर से 80 से अधिक प्रतिभागी अपना पंजीकरण करा चुके हैं। कार्यक्रम समन्वयक प्रो.गुड्डी बिष्ट पंवार ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकों से यूजीसी के एमएमसी पोर्टल पर समय रहते पंजीकरण कर इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम का लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर 16 जुलाई को एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो.डी.एस.नेगी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई जिसमें भारतीय भाषाओं पर आधारित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कार्यक्रम समन्वयक प्रो.गुड्डी बिष्ट पंवार एमएमटीटीसी के संयुक्त निदेशक डॉ.राहुल कुँवर सहायक निदेशक डॉ.सोमेश थपलियाल डॉ.अमरजीत परिहार सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
