प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पिछले वर्ष 6 अगस्त को पाबौ विकासखंड के बुरासी और सैंजी गांवों में हुई भीषण वर्षा एवं भूस्खलन ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया था। इस आपदा में जनहानि हुई, कई परिवार बेघर हो गए तथा सड़क पेयजल विद्युत सहित मूलभूत सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा कराए गए समयबद्ध राहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के परिणामस्वरूप आज एक वर्ष बाद दोनों गांवों में आधारभूत सुविधाएं बहाल हो चुकी हैं प्रभावित परिवार सुरक्षित आवासों में रह रहे हैं और जनजीवन सामान्य स्थिति की ओर लौट आया है। पाबौ क्षेत्र में आपदा की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून में आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर उनका हाल जाना तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देशन में जिला प्रशासन ने भी विभिन्न विभागों के समन्वय से युद्धस्तर पर राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किए और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया। बुरासी गांव में आई आपदा में कई मकान गौशालाएं और सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं जबकि सड़क पेयजल और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर संपर्क मार्गों को सुचारु कराया पेयजल और विद्युत आपूर्ति बहाल की सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को पुनर्स्थापित किया। आज गांव में सामान्य जनजीवन पूरी तरह बहाल हो चुका है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सरकार और प्रशासन द्वारा राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वास प्रक्रिया को मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ाया गया। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत भोजन चिकित्सा सुविधा तथा पुनर्वास से जुड़ी अन्य आवश्यक सहायता भी समय पर उपलब्ध कराई गई। ग्रामीण बताते हैं कि आपदा के बाद सरकार और जिला प्रशासन ने गांव को कभी अकेला नहीं छोड़ा। राहत कार्यों के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली ने लोगों में फिर से विश्वास जगाया। आज गांव में सड़क पेयजल बिजली और सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सुदृढ़ है। सैंजी गांव में आपदा प्रभावित सभी 16 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से 5-5 लाख रुपये की राहत धनराशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त जिन सात परिवारों की भूमि भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी ऐसे परिवारों को मकान निर्माण के लिए एसडीआरएफ के विस्थापन मद से 4.25 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। परिणामस्वरूप अब उनके नए मकान तैयार हो चुके हैं और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। जो परिवार एक वर्ष पहले अस्थायी आश्रयों में रहने को विवश थे वे आज अपने नए घरों में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ग्राम प्रधान सैंजी रेखा देवी बताती हैं कि आपदा के बाद सरकार जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों की टीमें लगातार गांव पहुंचती रहीं। राहत और पुनर्वास कार्यों की नियमित निगरानी का ही परिणाम है कि आज गांव के बेघर परिवार फिर से सम्मान के साथ अपने घरों में रह रहे हैं। बुरासी गांव की प्रधान बबीता देवी ने कहा कि आपदा ने गांव को गहरे जख्म दिए लेकिन सरकार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गांव को फिर से खड़ा किया गया। अब गांव में अधिकांश विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उस कठिन समय में सरकार ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी बल्कि हर कदम पर उनका मनोबल भी बढ़ाया। समयबद्ध पुनर्वास और निरंतर प्रशासनिक निगरानी के कारण वे आज फिर आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवीय उत्तरदायित्व मानते हुए कार्य किया। राहत वितरण से लेकर सुरक्षित आवास आधारभूत सुविधाओं की बहाली और आजीविका को पुनः पटरी पर लाने तक प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है तथा भविष्य में भी किसी भी आपदा की स्थिति में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ हर जरूरतमंद के साथ खड़ी रहेगी। आज बुरासी और सैंजी गांव केवल पुनर्निर्माण की कहानी नहीं बल्कि विश्वास संवेदनशीलता और सुशासन की जीवंत मिसाल हैं। जहां एक वर्ष पहले मलबा मातम और निराशा थी वहीं आज नए घर बहाल आधारभूत सुविधाएं और ग्रामीणों के चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का प्रमाण हैं कि मजबूत नेतृत्व संवेदनशील प्रशासन और जनसहयोग से किसी भी आपदा के घावों को भरकर विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 'राहत-बचाव से पुनर्वास और पुनर्वास से पुनर्विकास' के संकल्प ने इन गांवों में केवल पुनर्निर्माण ही नहीं बल्कि लोगों के जीवन में नया विश्वास भी स्थापित किया है।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पिछले वर्ष 6 अगस्त को पाबौ विकासखंड के बुरासी और सैंजी गांवों में हुई भीषण वर्षा एवं भूस्खलन ने जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया था। इस आपदा में जनहानि हुई, कई परिवार बेघर हो गए तथा सड़क पेयजल विद्युत सहित मूलभूत सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा कराए गए समयबद्ध राहत पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के परिणामस्वरूप आज एक वर्ष बाद दोनों गांवों में आधारभूत सुविधाएं बहाल हो चुकी हैं प्रभावित परिवार सुरक्षित आवासों में रह रहे हैं और जनजीवन सामान्य स्थिति की ओर लौट आया है। पाबौ क्षेत्र में आपदा की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून में आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर उनका हाल जाना तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। साथ ही जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देशन में जिला प्रशासन ने भी विभिन्न विभागों के समन्वय से युद्धस्तर पर राहत एवं पुनर्निर्माण कार्य प्रारंभ किए और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक समय पर सहायता पहुंचाना सुनिश्चित किया। बुरासी गांव में आई आपदा में कई मकान गौशालाएं और सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं जबकि सड़क पेयजल और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर संपर्क मार्गों को सुचारु कराया पेयजल और विद्युत आपूर्ति बहाल की सुरक्षा दीवारों का निर्माण कराया तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को पुनर्स्थापित किया। आज गांव में सामान्य जनजीवन पूरी तरह बहाल हो चुका है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में सरकार और प्रशासन द्वारा राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तेजी से कार्रवाई की गई। मुख्यमंत्री के निर्देशों पर जिला प्रशासन द्वारा पुनर्वास प्रक्रिया को मानवीय संवेदनाओं के साथ आगे बढ़ाया गया। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत भोजन चिकित्सा सुविधा तथा पुनर्वास से जुड़ी अन्य आवश्यक सहायता भी समय पर उपलब्ध कराई गई। ग्रामीण बताते हैं कि आपदा के बाद सरकार और जिला प्रशासन ने गांव को कभी अकेला नहीं छोड़ा। राहत कार्यों के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली ने लोगों में फिर से विश्वास जगाया। आज गांव में सड़क पेयजल बिजली और सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सुदृढ़ है। सैंजी गांव में आपदा प्रभावित सभी 16 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से 5-5 लाख रुपये की राहत धनराशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त जिन सात परिवारों की भूमि भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी ऐसे परिवारों को मकान निर्माण के लिए एसडीआरएफ के विस्थापन मद से 4.25 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। परिणामस्वरूप अब उनके नए मकान तैयार हो चुके हैं और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सुनिश्चित किया गया है। जो परिवार एक वर्ष पहले अस्थायी आश्रयों में रहने को विवश थे वे आज अपने नए घरों में सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ग्राम प्रधान सैंजी रेखा देवी बताती हैं कि आपदा के बाद सरकार जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों की टीमें लगातार गांव पहुंचती रहीं। राहत और पुनर्वास कार्यों की नियमित निगरानी का ही परिणाम है कि आज गांव के बेघर परिवार फिर से सम्मान के साथ अपने घरों में रह रहे हैं। बुरासी गांव की प्रधान बबीता देवी ने कहा कि आपदा ने गांव को गहरे जख्म दिए लेकिन सरकार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से गांव को फिर से खड़ा किया गया। अब गांव में अधिकांश विकास कार्य पूरे हो चुके हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उस कठिन समय में सरकार ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी बल्कि हर कदम पर उनका मनोबल भी बढ़ाया। समयबद्ध पुनर्वास और निरंतर प्रशासनिक निगरानी के कारण वे आज फिर आत्मनिर्भर होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवीय उत्तरदायित्व मानते हुए कार्य किया। राहत वितरण से लेकर सुरक्षित आवास आधारभूत सुविधाओं की बहाली और आजीविका को पुनः पटरी पर लाने तक प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन उपलब्ध कराना है तथा भविष्य में भी किसी भी आपदा की स्थिति में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ हर जरूरतमंद के साथ खड़ी रहेगी। आज बुरासी और सैंजी गांव केवल पुनर्निर्माण की कहानी नहीं बल्कि विश्वास संवेदनशीलता और सुशासन की जीवंत मिसाल हैं। जहां एक वर्ष पहले मलबा मातम और निराशा थी वहीं आज नए घर बहाल आधारभूत सुविधाएं और ग्रामीणों के चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का प्रमाण हैं कि मजबूत नेतृत्व संवेदनशील प्रशासन और जनसहयोग से किसी भी आपदा के घावों को भरकर विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘राहत-बचाव से पुनर्वास और पुनर्वास से पुनर्विकास’ के संकल्प ने इन गांवों में केवल पुनर्निर्माण ही नहीं बल्कि लोगों के जीवन में नया विश्वास भी स्थापित किया है।