प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पत्रकारों एवं मीडिया संस्थानों के हितों के संरक्षण तथा पत्रकार कल्याण को लेकर वॉइस ऑफ मीडिया नॉर्दर्न जोन ने मुख्यमंत्री को 15 सूत्रीय मांग-पत्र भेजा है। संगठन के नॉर्थ जोन अध्यक्ष दिनेश पाल सिंह गुसाईं की ओर से प्रस्तुत मांग-पत्र में पत्रकार सुरक्षा गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा सहित पत्रकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। मांग-पत्र में कहा गया है कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक एवं सामाजिक रूप से विशिष्ट राज्य में पत्रकारिता लोकतंत्र और जनसरोकारों के साथ-साथ शासन-प्रशासन तथा आम जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करती है। पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक पत्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद जोखिम उठाकर जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं। इसके बावजूद स्वतंत्र ग्रामीण डिजिटल लघु एवं गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों के सामने आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां हैं। वॉइस ऑफ मीडिया ने राज्य में प्रभावी पत्रकार सुरक्षा ढांचा अथवा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग की है ताकि पत्रकारों के साथ हिंसा धमकी उत्पीड़न एवं दबाव की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। संगठन ने गैर-मान्यताप्राप्त पत्रकारों को भी पत्रकार कल्याण योजनाओं में शामिल करने वास्तविक पत्रकारिता कार्य के सत्यापन के आधार पर उन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा राज्य पत्रकार कल्याण कोष का विस्तार करने की मांग की है। वरिष्ठ पत्रकारों के लिए सरल एवं व्यापक पत्रकार पेंशन योजना लागू करने के साथ ही लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे स्वतंत्र एवं ग्रामीण पत्रकारों को भी इसका लाभ देने की मांग की गई है। इसके अलावा पत्रकारों एवं उनके परिवारों के लिए नकदरहित स्वास्थ्य बीमा दुर्घटना एवं जीवन बीमा की व्यवस्था करने तथा दून अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में पत्रकारों के लिए विशेष टिकट काउंटर बनाने का सुझाव दिया गया है। मांग-पत्र में लघु ग्रामीण डिजिटल एवं स्वतंत्र मीडिया संस्थानों के लिए पारदर्शी सरकारी विज्ञापन नीति सरकारी विज्ञापनों के वितरण में स्पष्ट पात्रता एवं दर व्यवस्था तथा विज्ञापन आवंटन में प्रसार पहुंच जनसरोकार और पत्रकारिता की गुणवत्ता को महत्व देने की मांग की गई है। संगठन ने प्रत्येक जिला मुख्यालय एवं प्रमुख विकासखंडों में मीडिया केंद्र अथवा प्रेस सुविधा केंद्र स्थापित करने लंबे समय से कार्यरत पत्रकारों के लिए आवासीय योजनाओं में पृथक कोटा अथवा रियायती आवास व्यवस्था करने तथा आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति एवं व्यावसायिक शिक्षा सहायता योजना शुरू करने की मांग भी रखी है। बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए डिजिटल समाचार पोर्टल वेब मीडिया मोबाइल पत्रकारिता एवं स्वतंत्र पत्रकारों के लिए पारदर्शी मान्यता एवं पंजीकरण व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है। पत्रकारों के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण के लिए डिजिटल पत्रकारिता साइबर सुरक्षा खोजी पत्रकारिता आपदा रिपोर्टिंग तथ्य-जांच एवं मीडिया कानून जैसे विषयों पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का भी प्रस्ताव दिया गया है। उत्तराखंड की आपदा एवं भौगोलिक संवेदनशीलता को देखते हुए बाढ़ भूस्खलन वनाग्नि भूकंप और अन्य आपदाओं की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण आवश्यक उपकरण एवं बीमा कवर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। वॉइस ऑफ मीडिया ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय पत्रकार कल्याण परिषद गठित करने का प्रस्ताव रखा है। परिषद में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ-साथ गैर-मान्यताप्राप्त ग्रामीण डिजिटल एवं स्वतंत्र पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों को भी उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई है। वॉइस ऑफ मीडिया के नॉर्थ जोन अध्यक्ष दिनेश पाल सिंह गुसाईं ने मुख्यमंत्री से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना किसी व्यक्ति या संगठन को लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि स्वतंत्र निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता को मजबूत करने की दिशा में निवेश है। वॉइस ऑफ मीडिया ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार पत्रकारों की समस्याओं और मांगों पर सकारात्मक एवं संवेदनशील निर्णय लेते हुए उत्तराखंड में पत्रकार कल्याण के लिए ठोस पहल करेगी।
