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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। निवेश की रकम करीब एक साल में दोगुनी करने का झांसा देकर 3.30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में पौड़ी पुलिस ने मुख्य आरोपी की बहन और कथित डॉक्टर ज्योति श्रॉफ को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी महिला निवेशकों का विश्वास जीतकर उन्हें विभिन्न निवेश योजनाओं में रकम लगाने के लिए प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। मामला वर्ष 2021-22 का है। शिकायतकर्ता शैली लिंगवाल के अनुसार जिगनेश श्रॉफ सुनील दामू मूले ज्योति श्रॉफ श्रीकांत परमार और चिंतन शाह आदि ने स्वयं को श्री महाकाली ग्रुप कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए उनसे उनके पति रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया था। आरोपियों ने कंपनी की विभिन्न निवेश योजनाओं में रकम लगाने के लिए प्रेरित करते हुए करीब एक वर्ष में निवेश की राशि दोगुनी करने का भरोसा दिलाया था। विश्वास में आने के बाद शिकायतकर्ता और उनके रिश्तेदारों ने कुल 3 करोड़ 30 लाख रुपये निवेश किए लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद न तो ब्याज की रकम दी गई और न ही मूलधन वापस किया गया। शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की गई और बाद में प्रकरण नियमित पुलिस को हस्तांतरित होने पर कोतवाली पौड़ी में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देश पर आर्थिक धोखाधड़ी के इस मामले में प्रभावी विवेचना की गई। विवेचना में सामने आया कि वर्ष 2021-22 में सुनील दामू ने शिकायतकर्ता के पति उत्तम सिंह का परिचय जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह उर्फ डॉक्टर से कराया था। उसे श्री महाकाली ग्रुप कंपनी चलाने वाला व्यक्ति बताते हुए निवेश से अधिक मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई बार बातचीत और मुलाकातें हुईं तथा अलग-अलग तिथियों में शिकायतकर्ता और उनके रिश्तेदारों ने कुल 3.30 करोड़ रुपये निवेश किए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए एक ही आधार संख्या का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग नाम और पते वाले पहचान दस्तावेजों का प्रयोग किया। पुलिस के अनुसार सभी आरोपियों ने मिलकर पहले निवेशकों का विश्वास हासिल किया और फिर उन्हें कंपनी में रकम लगाने के लिए प्रेरित किया। फर्जी दस्तावेजों के निर्माण और इस्तेमाल से संबंधित साक्ष्य मिलने पर मामले में संबंधित धाराओं की बढ़ोतरी की गई। जांच के दौरान पुलिस के अनुसार डॉ.ज्योति श्रॉफ की भूमिका भी सामने आई। वह मुख्य आरोपी जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह की बहन है और खुद को डॉक्टर बताती है। आरोप है कि वह लोगों को प्रभावित करने उनका विश्वास जीतने और विभिन्न प्रलोभन देकर निवेश के लिए प्रेरित करने में सक्रिय रूप से शामिल रही। पुलिस के मुताबिक वह अपने भाई के साथ लगातार संपर्क में रहकर आपराधिक षड्यंत्र के तहत निवेशकों को जोड़ने में सहयोग करती रही। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी जिगनेश श्रॉफ उर्फ मनीष शाह के खिलाफ महाराष्ट्र में भी धोखाधड़ी और आपराधिक मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। वह उन मामलों में जेल भी जा चुका है और वर्तमान में फरार चल रहा है। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है। वहीं सह आरोपी सुनील दामू मूले को सितंबर 2024 में मुंबई की आर्थर रोड सेंट्रल जेल से लाकर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया था जिसके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय भेजा जा चुका है। सह आरोपी चिंतन शाह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर फरवरी 2026 में तथा श्रीकांत परमार के खिलाफ विवेचना पूरी होने के बाद मार्च 2026 में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में 22 जुलाई 2026 को डॉ.ज्योति श्रॉफ के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी ने 1500 रुपये का इनाम भी घोषित किया था। इसके बाद पुलिस टीम को उसकी गिरफ्तारी और वारंट की तामील के लिए गुजरात भेजा गया। टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय करते हुए संभावित ठिकानों पर लगातार तलाश की और तकनीकी विश्लेषण व सूचना संकलन के आधार पर आरोपी महिला को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी को आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय के समक्ष पेश किया गया जहां से मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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