प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित एकेडमिक एक्टिविटी सेंटर में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा मंत्रालय संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह रहे। अपने संबोधन में कुलपति प्रो.सिंह ने विभाजन की पीड़ा को रेखांकित करते हुए कहा कि कभी किसी देश का विभाजन नहीं होना चाहिए। कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता कि उसकी विरासत देश परिवार या जमीन का बंटवारा हो। उन्होंने विभाजन की त्रासदी और उस दौरान अनगिनत लोगों द्वारा झेले गए संघर्ष एवं पीड़ा को स्मरण करते हुए युवाओं से राष्ट्रीय एकता अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं नेहरू युवा केंद्र भारत सरकार के पूर्व सहायक निदेशक डॉ. योगेश धस्माना ने वर्ष 1947 के विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों मानवीय त्रासदियों तथा इसके दूरगामी प्रभावों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन के दौर में हिमालयी क्षेत्र के जनमानस के योगदान एवं उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के समन्वयक प्रो.राजपाल सिंह नेगी ने विषय से संबंधित संकल्पना पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने विभाजन के विभिन्न अनछुए एवं कम चर्चित पहलुओं पर गहन और निष्पक्ष शोध की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी का सफल संचालन संगठन सचिव डॉ.सुभाष चंद्र ने किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ.सुरेन्द्र सिंह बिष्ट ने सभी अतिथियों वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नोडल अधिकारी प्रो.योगम्बर सिंह फर्स्वाण संगठन सचिव डॉ.नागेंद्र सिंह रावत तथा आयोजन समिति के सदस्य डॉ.श्वेता वर्मा डॉ.ज्योत्सना सोनल डॉ.सुबोध मेंडाली डॉ.भाष्करानंद पंत डॉ.सुनील सिंह एवं जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
