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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं संवर्धन के उद्देश्य से उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के तत्वावधान में मंगलवार को जनपद रुद्रप्रयाग के आदर्श संस्कृत ग्राम बेंजी में संस्कृत सप्ताह का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संस्कृत शोभायात्रा से हुई। शोभायात्रा में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और संस्कृत के उद्घोषों से पूरा गांव संस्कृतमय हो उठा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा बेंजी को संस्कृत ग्राम घोषित किए जाने के बाद 10 अगस्त 2025 को इसका विधिवत उद्घाटन किया गया था। वर्तमान में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माध्यम से नियुक्त शिक्षक ग्रामीणों को संस्कृत का सरल रूप में प्रशिक्षण देकर इसे आम बोलचाल की भाषा बनाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद से गांव में संस्कृत भाषा के माध्यम से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिल रही है। बेंजी गांव प्राचीन काल से ही संस्कृत के श्रेष्ठ विद्वानों की जन्मस्थली रहा है। इसी गांव में शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज का जन्म हुआ जिन्होंने अपने संस्कृत ज्ञान के माध्यम से देश-विदेश में संस्कृत का प्रचार-प्रसार किया। वर्तमान में भी गांव के अनेक संस्कृतज्ञ संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। शोभायात्रा के बाद गांव के मध्य स्थित शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज की स्मृति में निर्मित संग्रहालय भवन परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य गम्भीर सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अयोध्या प्रसाद बेंजवाल ने की जबकि संस्कृताचार्य उमेश भट्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक जदम्बा प्रसाद बेंजवाल ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा रुद्रप्रयाग मनसाराम मैंदुली के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में ग्रामीणों के साथ विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया और संस्कृत भाषा में विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। मुख्य अतिथि गम्भीर सिंह बिष्ट ने कहा कि संस्कृत जन्म से लेकर जीवन पर्यंत साथ चलने वाली दिव्य एवं अलौकिक भाषा है। इसे अक्षुण्ण और जीवंत बनाए रखना सभी का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि संस्कृत में विश्व मंगल की कामना निहित है और जीवन मूल्यों को सुव्यवस्थित करने की क्षमता भी इसी भाषा में है। इस अवसर पर दीपक बेंजवाल सत्य प्रकाश मनोज अरुण प्रसाद नीलकंठ सुधा देवी सुलोचना देवी भागीरथी देवी उर्मिला देवी सहित अन्य ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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