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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रुद्रप्रयाग के तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखोली में आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद शिविर में 22 लोगों के नेत्रों की जांच की गई। जांच के दौरान नौ ग्रामीणों की आंखों में मोतियाबिंद की समस्या पाई गई जिनका देहरादून स्थित विवेकानंद नेत्रालय में निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाएगा। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.सीमा टेकचंदानी ने बताया कि शिविर में विवेकानंद नेत्रालय रामकृष्ण मिशन आश्रम किशनपुर देहरादून की स्वास्थ्य टीम ने 12 पुरुषों और 10 महिलाओं सहित कुल 22 लोगों के नेत्रों की जांच की। इनमें पांच पुरुष और चार महिलाएं मोतियाबिंद से ग्रसित पाई गईं। इन सभी का देहरादून स्थित विवेकानंद नेत्रालय में निःशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। संबंधित ग्रामीणों को विवेकानंद नेत्रालय, रामकृष्ण मिशन आश्रम की टीम द्वारा रविवार को देहरादून ले जाया जाएगा। शिविर के दौरान 16 ग्रामीणों को दवाएं भी वितरित की गईं। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अगला निःशुल्क मोतियाबिंद शिविर 5 सितंबर को ग्राम सभा मनसूना में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने जनमानस से इन निःशुल्क शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। शिविरों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र की आशा फेसिलिटेटर और आशा कार्यकत्री से संपर्क किया जा सकता है। शिविर में आगामी 8 सितंबर तक मनाए जा रहे नेत्रदान पखवाड़े के तहत जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ.खुशपाल ने नेत्रदान के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि आंख के एक हिस्से कार्निया का प्रत्यारोपण कर नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि कार्निया की भारी कमी है और नेत्रदान एक नेक कार्य है। इसके माध्यम से नेत्रहीन लोगों को दृष्टि का अमूल्य उपहार दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नेत्रदान मृत्यु के बाद किया जाता है और मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर आंख ली जानी आवश्यक होती है। नेत्रदान के लिए चिकित्सक स्वयं घर जाकर आंख निकालते हैं और यह प्रक्रिया निःशुल्क होती है। किसी भी उम्र का व्यक्ति अपनी मृत्यु के बाद नेत्रदान की प्रतिज्ञा कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि उसकी आंख की कार्निया साफ और स्वस्थ हो। उन्होंने बताया कि मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकता है। डॉ.खुशपाल ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने जीवन में नेत्रदान की घोषणा नहीं की हो, तब भी उसके किसी संबंधी को नेत्रदान कराने का अधिकार है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिहीन लोगों को दोबारा दुनिया देखने का अवसर मिल सकता है। नेत्र सुरक्षा के संबंध में भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वर्ष में कम से कम एक बार नेत्र विशेषज्ञ से आंखों की जांच कराने बच्चों को नुकीली वस्तुओं और ऐसे खिलौनों से दूर रखने की अपील की गई जिनसे आंखों को चोट लग सकती है। आई फ्लू होने पर नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेने और चिकित्सकीय सलाह के बिना किसी भी प्रकार की दवा का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई। नेत्रदान से संबंधित जानकारी के लिए हेल्थ हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है। मोतियाबिंद शिविर में सेवा प्रदान करने वालों में विवेकानंद नेत्रालय रामकृष्ण मिशन आश्रम किशनपुर देहरादून के दृष्टिमितिज्ञ हनुमंत सिंह पंवार राकेश कुंवर आदि मौजूद रहे।

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