प्रदीप कुमार
कर्णप्रयाग-चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित ग्रामोत्थान परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। परियोजना से जुड़कर कई महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। ग्राम कनौठ निवासी लक्ष्मी देवी भी डेयरी व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ते हुए अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं। लक्ष्मी देवी अनुसूया मां ग्राम संगठन एवं नंदा क्लस्टर नौटी के अंतर्गत संचालित जय संतोषी मां स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी आजीविका को मजबूत करने के लिए डेयरी व्यवसाय को अपनाया। इसके लिए उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए पशुपालन को आय के नियमित स्रोत के रूप में विकसित किया। ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत अल्ट्रा पुअर पैकेज के माध्यम से उन्हें 35 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। लक्ष्मी देवी ने इस सहायता का उपयोग डेयरी गतिविधि को आगे बढ़ाने में किया और इसे अपने परिवार की आय का मजबूत जरिया बनाया। मेहनत और निरंतर प्रयासों का परिणाम है कि वर्तमान में लक्ष्मी देवी स्थानीय बाजार में प्रतिदिन लगभग 8 से 10 लीटर दूध बेच रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार से 12 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। डेयरी व्यवसाय से होने वाली इस अतिरिक्त आमदनी ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लक्ष्मी देवी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और परियोजना के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें अपनी आजीविका को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज वह अपने काम को लेकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं और परिवार की आर्थिक जरूरतों में भी अपना योगदान दे रही हैं।
