प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग–मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित एक माह लंबे नवनियुक्त शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम-2026 का बुधवार को गरिमामय शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 2 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से 92 नवनियुक्त शिक्षक ऑनलाइन एवं प्रत्यक्ष माध्यम से प्रतिभाग कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नव नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय नालंदा के कुलपति प्रो.सिद्धार्थ सिंह तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के कुलपति प्रो.सीबी शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग–मदन मोहन मालवीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए नवनियुक्त शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों को उच्च शिक्षा की बदलती आवश्यकताओं अकादमिक मूल्यों शिक्षण पद्धतियों अनुसंधान एवं संस्थागत उत्तरदायित्वों से परिचित कराने में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अपने उद्घाटन संबोधन में कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं है बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व चरित्र एवं भविष्य के निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से निरंतर सीखने नवाचार अपनाने तथा बदलती उच्च शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप स्वयं को विकसित करने का आह्वान किया। प्रो.सिद्धार्थ सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में ज्ञान विज्ञान दर्शन संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों का अद्भुत समन्वय रहा है। उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा एवं शिक्षण पद्धतियों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो.सीबी शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा को अधिक समग्र लचीला बहुविषयक एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवाचार लाने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रो.देवेंद्र सिंह नेगी ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण-अधिगम अनुसंधान एवं अकादमिक उत्कृष्टता भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मूल्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 व्यावसायिक नैतिकता एवं अकादमिक सत्यनिष्ठा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल दक्षता और संस्थागत कार्यप्रणाली एवं शासन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम की मूल भावना ‘अभिमुखीकरण प्रेरणा एवं सशक्तिकरण’ है।
*उच्च शिक्षा नीति और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि पर हुई चर्चा*
कार्यक्रम के सायंकालीन अकादमिक सत्र में प्रो.आरटी बेदरा हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर तथा प्रो. आशीष श्रीवास्तव बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। प्रो.आरटी बेदरा ने उच्च शिक्षा नीति उसके विकास एवं वर्तमान परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए उच्च शिक्षा में हो रहे नीतिगत परिवर्तनों गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा शिक्षकों की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रो.आशीष श्रीवास्तव ने नवनियुक्त शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम की अवधारणा आवश्यकता उत्पत्ति एवं विकास की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझाते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम नवनियुक्त शिक्षकों को उच्च शिक्षा की अकादमिक संस्कृति संस्थागत कार्यप्रणाली शिक्षण-अधिगम अनुसंधान व्यावसायिक नैतिकता एवं शिक्षक के उत्तरदायित्वों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता नवाचार अकादमिक उत्कृष्टता व्यावसायिक विकास तथा विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पर विशेष बल दिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद करते हुए विभिन्न प्रश्न भी पूछे। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय डॉ.अमर जीत सिंह डॉ.सोमेश थपलियाल डॉ. कविता भट्ट एवं डॉ.राहुल के सिंह द्वारा किया गया। उद्घाटन दिवस ने नवनियुक्त शिक्षकों के लिए ज्ञान प्रेरणा एवं व्यावसायिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक एवं उद्देश्यपूर्ण शुरुआत प्रदान की। नवनियुक्त शिक्षक अभिमुखीकरण कार्यक्रम-2026 ‘सा विद्या या विमुक्तये’ के आदर्श वाक्य को आत्मसात करते हुए ऐसे शिक्षकों के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है जो सक्षम नैतिक नवाचारी संवेदनशील एवं भविष्य-दृष्टि संपन्न शिक्षाविद् बनकर राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
