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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग बिड़ला परिसर द्वारा आयोजित संस्कृत सप्ताह महोत्सव के द्वितीय दिवस का कार्यक्रम बुधवार को भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा संस्कृत भाषा की प्रासंगिकता और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा पर विशेष रूप से चर्चा की गई। इस दौरान संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत महाकवि कालिदास के जीवन प्रसंग पर आधारित लघु नाटक ‘कालिदासस्य विवाहः’ मुख्य आकर्षण रहा जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुई। संस्कृत विभाग बिड़ला परिसर के विभागाध्यक्ष डॉ.विश्वेश वाग्मी ने स्वागत वक्तव्य के माध्यम से सभी अतिथियों शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार संस्कृत विद्या में निहित है और भारत के स्व का साक्षात्कार संस्कृत के ज्ञान के माध्यम से ही संभव है। समारोह की मुख्य वक्ता दर्शनशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ.कविता भट्ट ने भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के गहरे अंतर्संबंधों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान और परंपराओं को आज पूरी दुनिया सम्मान के साथ स्वीकार कर रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.कमला चौहान ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने संस्कृत भाषा के वैश्विक महत्व सांस्कृतिक विरासत तथा आधुनिक परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्कृत को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हिंदी विभाग के आचार्य डॉ.कपिल पंवार तथा लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के आचार्य डॉ.महेंद्र पंवार ने विद्यार्थियों की नाट्य प्रतिभा की सराहना की। उन्होंने भविष्य में दोनों विभागों के संयुक्त तत्वावधान में नाटकों के मंचन की योजना पर भी विचार साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा महाकवि कालिदास के जीवन प्रसंग पर आधारित लघु नाटक ‘कालिदासस्य विवाहः’ का जीवंत मंचन रहा। विद्यार्थियों ने अपनी अभिनय प्रतिभा और प्रभावी प्रस्तुति से दर्शकों को प्रभावित किया। नाटक की प्रस्तुति के दौरान सभागार तालियों से गूंज उठा और दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने संस्कृत के सुभाषितों का सस्वर पाठ प्रस्तुत किया। सुभाषितों के प्रभावी पाठ से कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के लालित्य और सौंदर्य की विशेष छटा देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान संस्कृत सप्ताह महोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा भारतीय ज्ञान परंपरा साहित्य एवं संस्कृति से जोड़ने के प्रयासों पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा के प्रति समझ और रुचि विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावी मंच संचालन डॉ.बालकृष्ण बधानी ने किया। अंत में डॉ.प्रीति ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसके बाद ध्येय मंत्र एवं शांतिपाठ का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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