प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की वास्तविक अधिगम स्थिति परखने के लिए शासन के निर्देश पर दक्षता आधारित आकलन कराया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी ने बताया कि प्रथम चरण में 7 सितंबर को जनपदभर के सभी राजकीय विद्यालयों में कक्षा 2 कक्षा 5 और कक्षा 8 में अध्ययनरत विद्यार्थियों का दक्षता आकलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कक्षा 2 में हिंदी एवं गणित कक्षा 5 में हिंदी गणित एवं पर्यावरण तथा कक्षा 8 में हिंदी गणित विज्ञान एवं सामाजिक विषय का आकलन किया जाएगा। आकलन के बाद विद्यार्थियों के प्रदर्शन का कक्षावार एवं दक्षतावार विश्लेषण किया जाएगा। अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करने वाले विद्यार्थियों के लिए सुधारात्मक शिक्षण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि दक्षता आधारित आकलन के प्रश्नपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा से उपलब्ध कराए जाएंगे। इन प्रश्नपत्रों को अनिवार्य रूप से 6 सितंबर तक सभी राजकीय विद्यालयों में पहुंचाना होगा। प्रथम आकलन के बाद 28 सितंबर को मध्यावधि आकलन कराया जाएगा। उन्होंने सभी खंड एवं उप शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में शत प्रतिशत छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए विद्यालयों की प्रार्थना सभा में प्रतिदिन छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जाए। साथ ही अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समितियों को भी आकलन के संबंध में जानकारी दी जाए। मध्यावधि समीक्षा के बाद कमजोर दक्षता वाले विद्यालयों में सहयोग के लिए बीआरपी एवं सीआरपी डायट फैकल्टी तथा शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठनों को लगाया जाएगा। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। अगस्त्यमुनि के लिए डीओ माध्यमिक सोनी महरा ऊखीमठ के लिए खंड शिक्षा अधिकारी यशवीर रावत और जखोली के लिए उप शिक्षा अधिकारी तनुजा देवराड़ी को जिम्मेदारी दी गई है। उनके सहयोग के लिए बीआरपी एवं सीआरपी लगाए गए हैं। प्रत्येक तीन न्याय पंचायतों पर एक मेंटर तैनात रहेगा। पूरे दक्षता आकलन का अनुश्रवण डायट प्राचार्य मुख्य शिक्षा अधिकारी और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद से नामित अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य आकलन प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के साथ विद्यार्थियों की वास्तविक सीखने की स्थिति के आधार पर कमजोर दक्षताओं को चिह्नित कर उनके सुधार के लिए प्रभावी शिक्षण योजना तैयार करना है।
