प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल क्षेत्र में गंजेपन की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल में पहली बार निःशुल्क हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की गई है। त्वचा रोग विभाग में फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन यानी एफयूई तकनीक के माध्यम से हेयर ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में इस तरह की महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा सुविधा निःशुल्क उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.दीपक डिमरी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अत्रेयो चक्रवर्ती के प्रयासों से यह सेवा शुरू की गई है। इसके तहत पुरुषों में होने वाले गंजेपन की समस्या के उपचार के लिए एफयूई तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। विभाग में इस सेवा के शुरू होने से चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों में भी उत्साह है। इस सेवा के तहत पहला हेयर ट्रांसप्लांट श्रीकोट निवासी अर्जुन का किया गया। प्रक्रिया को सफलतापूर्वक शुरू करने में चिकित्सकों की टीम को पहले दिन करीब छह से सात घंटे का समय लगा। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में की गई। बेस अस्पताल में शुरू हुई इस सेवा के पहले लाभार्थी अर्जुन ने चिकित्सकों और अस्पताल प्रबंधन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इतनी महंगी प्रक्रिया का सरकारी अस्पताल में निःशुल्क उपलब्ध होना उन लोगों के लिए काफी मददगार होगा जो आर्थिक कारणों से निजी अस्पतालों में उपचार नहीं करा पाते। एफयूई यानी फॉलिक्युलर यूनिट एक्सट्रैक्शन हेयर ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीकों में से एक है। इसमें सिर के उस हिस्से से जहां बालों की जड़ें मजबूत होती हैं छोटे-छोटे फॉलिक्युलर यूनिट यानी हेयर ग्राफ्ट निकाले जाते हैं और उन्हें गंजेपन से प्रभावित हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस तकनीक में प्रत्येक ग्राफ्ट को सावधानीपूर्वक निकालकर निर्धारित स्थान पर लगाया जाता है। डॉ.अत्रेयो चक्रवर्ती के अनुसार मरीज की आवश्यकता और गंजेपन की स्थिति के आधार पर सामान्यतः एक हजार से पांच हजार तक ग्राफ्ट लगाए जा सकते हैं। हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। हेयर ट्रांसप्लांट को आमतौर पर महंगी कॉस्मेटिक चिकित्सा प्रक्रिया माना जाता है। निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में इसकी लागत चिकित्सक तकनीक ग्राफ्ट की संख्या और संस्थान के अनुसार अलग-अलग होती है। सामान्य तौर पर प्रति ग्राफ्ट या बाल की दर के आधार पर उपचार का खर्च काफी अधिक हो सकता है और कई मामलों में करीब डेढ़ लाख से पांच लाख रुपये या इससे अधिक तक पहुंच जाता है। ऐसे में बेस अस्पताल श्रीनगर में यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध होना गंजेपन की समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। बेस अस्पताल में इससे पहले भी त्वचा रोग विभाग में फोटोथेरेपी और लेजर तकनीक के माध्यम से विभिन्न त्वचा रोगों का उपचार किया जा रहा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ये सुविधाएं क्षेत्र के अन्य अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं। विभाग का प्रयास है कि मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में यहीं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। हेयर ट्रांसप्लांट सेवा शुरू करने के पीछे त्वचा रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.अत्रेयो चक्रवर्ती का एक संकल्प भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि एम्स से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मन में ठाना था कि डर्मेटोलॉजी के क्षेत्र में जो उपचार सबसे महंगा होगा उसे जरूरतमंद मरीजों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगी। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में सेवा देने का अवसर मिलने पर उन्होंने अपने इस संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाया और यहां हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू की। उन्होंने बताया कि गंजेपन की समस्या से परेशान लोग बेस अस्पताल के त्वचा रोग विभाग में संपर्क कर इस सेवा का लाभ ले सकते हैं। मरीज की स्थिति का चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद यह तय किया जाएगा कि उसके लिए हेयर ट्रांसप्लांट उपयुक्त है या नहीं। इस सेवा का लाभ केवल मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में यूजी और पीजी स्तर पर अध्ययन कर रहे मेडिकल छात्रों को भी आधुनिक हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक को नजदीक से समझने और सीखने का अवसर मिलेगा। त्वचा रोग विभाग में इस तरह की अत्याधुनिक प्रक्रिया शुरू होने से मेडिकल शिक्षा और क्लीनिकल ट्रेनिंग को भी मजबूती मिलेगी। छात्रों को हेयर लॉस गंजेपन के विभिन्न पैटर्न मरीज के चयन हेयर फॉलिकल की पहचान ग्राफ्ट निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा। बेस अस्पताल श्रीनगर में हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक इस तरह की महंगी कॉस्मेटिक प्रक्रिया के लिए लोगों को बड़े निजी अस्पतालों या महानगरों का रुख करना पड़ता था। इससे मरीजों को उपचार के साथ यात्रा और रहने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता था। अब गढ़वाल के लोगों को श्रीनगर में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में एफयूई तकनीक से हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा निःशुल्क मिल सकेगी। इससे मरीजों को राहत मिलने के साथ ही राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के त्वचा रोग विभाग की सेवाओं का भी विस्तार होगा। चिकित्सकों के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट हर मरीज के लिए आवश्यक या उपयुक्त नहीं होता। इसलिए इच्छुक मरीजों का पहले विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण किया जाएगा। उनकी समस्या बालों की स्थिति और उपलब्ध हेयर डोनर एरिया का आकलन करने के बाद उपचार की उपयुक्तता तय की जाएगी। चिकित्सकों का कहना है कि विभाग में हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से मरीजों को आधुनिक उपचार की एक और महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध हुई है। इससे पहले भी विभाग में फोटोथेरेपी और लेजर तकनीक के माध्यम से विभिन्न त्वचा रोगों का उपचार किया जा रहा है। प्रयास है कि मरीजों को अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में यहीं उपलब्ध कराई जाएं ताकि उन्हें उपचार के लिए बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। हेयर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया में डॉ.स्वाति डॉ.एशना सिंह डॉ.तुलिका कोनल डॉ.नाजिया तल्ले डॉ.दीक्षा अग्रवाल डॉ.अमित बाछले डॉ.नमित डॉ.अनुभव अनुराग सहित तकनीशियन मौजूद रहे।
