प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से जागरूकता एवं शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मानसिक परेशानी को पहचानने संवेदनशीलता के साथ व्यक्ति की बात सुनने और जरूरत पड़ने पर उसे समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ‘खाली कुर्सी’ गतिविधि से हुई। खाली कुर्सी ऐसे व्यक्ति का प्रतीक थी जो हमारे बीच रहते हुए भी अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पा रहा है। कुछ क्षण के मौन के बाद प्रतिभागियों को समझाया गया कि हर परेशानी दिखाई नहीं देती। ऐसे में किसी व्यक्ति से केवल इतना पूछना कि “आप ठीक हैं? मैं आपकी बात सुन सकता हूं” भी उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। इस दौरान प्रतिभागियों ने अनाम पर्चियों पर “अगर कभी तुम बहुत टूटे हुए महसूस करो तो मैं…” वाक्य पूरा करते हुए किसी की बात सुनने उसके साथ रहने और जरूरत पड़ने पर उसे सहायता तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की विशेष गतिविधि ‘जीने के 100 कारण’ रही। इसमें प्रतिभागियों और मरीजों ने जीवन से जुड़े छोटे-बड़े कारण साझा किए। इनमें माता-पिता और बच्चों का साथ किसी अपने की मुस्कान दोस्ती अधूरे सपने घर लौटना पहाड़ों की सुबह पसंदीदा संगीत किसी से फिर मिलने की इच्छा आने वाला कल और नई शुरुआत की उम्मीद जैसे कारण शामिल रहे। इस गतिविधि के माध्यम से संदेश दिया गया कि गहरी परेशानी के समय जीवन के बड़े उद्देश्य भले ही दिखाई न दें लेकिन कोई छोटा रिश्ता अधूरा सपना या आने वाले कल की उम्मीद भी आगे बढ़ने की वजह बन सकती है। कार्यक्रम में सामूहिक आत्महत्या रोकथाम शपथ भी ली गई। इसमें हर जीवन को महत्वपूर्ण मानने मानसिक परेशानी और आत्महत्या से जुड़ी बातों को गंभीरता से लेने बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनने तथा समय पर मदद लेने और जरूरतमंद तक मदद पहुंचाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का सामूहिक संदेश रहा “मैं सुनूंगा। मैं पूछूंगा। मैं साथ रहूंगा।” इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम के समापन पर कहा गया कि शपथ की सार्थकता उसे बोलने में नहीं बल्कि किसी परेशान व्यक्ति की चुप्पी पहचानकर उसके साथ खड़े होने में है। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ.एएन पांडे मनोचिकित्सा विभाग के एचओडी डॉ.मोहित कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.पार्थ दत्ता एवं डॉ.मोहित सैनी सीनियर रेजिडेंट जूनियर रेजिडेंट अस्पताल के कर्मचारी मेडिकल विद्यार्थी तथा मरीज उपस्थित रहे।
