प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हिंदी दिवस के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति उसकी समृद्ध परंपरा बदलते भाषाई परिदृश्य तथा हिंदी के माध्यम से रोजगार की बढ़ती संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता करते हुए हिंदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम की संयोजक एवं हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मंजुला राणा ने कहा कि वर्तमान समय में अंग्रेजी के समानांतर हिंदी की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। हिंदी का विस्तार केवल साहित्य और संचार तक सीमित नहीं है बल्कि रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में भी हिंदी के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी की शब्दावली निरंतर समृद्ध हो रही है और तकनीक मीडिया पत्रकारिता प्रशासन तथा अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है। हिंदी की परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है लेकिन आज यह परंपरा से आगे बढ़कर रोजगार की भाषा के रूप में भी अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास के लिए भाषा को अनावश्यक रूप से क्लिष्ट बनाने से बचना होगा तथा ऐसी सहज और बोधगम्य हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए जो व्यापक समाज तक आसानी से पहुंच सके। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.विश्वेश वाग्मी ने संस्कृत से हिंदी तक भाषा के विकास की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं की विकास परंपरा को समझने के लिए संस्कृत से आधुनिक भारतीय भाषाओं तक की भाषिक यात्रा को समझना आवश्यक है। उन्होंने भाषा के विभिन्न कार्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि भाषा केवल विचारों की अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है बल्कि ज्ञान संस्कृति परंपरा और सामाजिक संबंधों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण साधन भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी में व्यापक शब्द भंडार उपलब्ध है और आवश्यकता के अनुरूप नए शब्दों को आत्मसात करने की उसकी क्षमता भी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान समय में हिंदी की स्थिति मजबूत है तथा बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में हिंदी की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। डॉ.कपिल देव पंवार ने हिंदी की वर्तमान स्थिति और रोजगार के नए आयामों पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज हिंदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिजिटल मीडिया सोशल मीडिया पत्रकारिता अनुवाद विज्ञापन कंटेंट लेखन तकनीकी संचार शिक्षण और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने हिंदी के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी के विद्यार्थियों को भाषा एवं साहित्य के पारंपरिक अध्ययन के साथ-साथ डिजिटल तकनीक संचार कौशल और नए रोजगारपरक क्षेत्रों की जानकारी भी प्राप्त करनी चाहिए। उन्होंने हिंदी को केवल साहित्य की भाषा के रूप में देखने के बजाय ज्ञान तकनीक संचार और रोजगार की भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। वर्षा प्रिया कुमारी योगेश अजय सोनिया प्रमोद नितिन एवं लवकेश ने भी हिंदी भाषा एवं साहित्य से संबंधित अपने विचार प्रस्तुत किए तथा अपनी रचनाओं का पाठ किया। वक्ताओं ने हिंदी की समृद्ध साहित्यिक परंपरा, समकालीन प्रासंगिकता और बदलते समय में भाषा की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर डॉ.सविता मैठाणी डॉ.गिरीश नंदनी डॉ.आकाशदीप और डॉ.अंकित उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी तरुण नौटियाल ने किया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान उसके व्यापक प्रयोग तथा हिंदी को ज्ञान एवं रोजगार की सशक्त भाषा बनाने की आवश्यकता पर विशेष रूप से जोर दिया गया। समारोह में उपस्थित प्रतिभागियों ने हिंदी के विकास प्रचार-प्रसार और उसके व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया।
