प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। आयुर्वेद दिवस देशभर में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के पर्यवेक्षण एवं निर्देशन में मनाया जा रहा है ताकि आयुर्वेद के महत्व तथा स्वास्थ्य और कल्याण में इसके योगदान के प्रति जागरूकता लाई जा सके। इसी राष्ट्रीय पहल के अंतर्गत फार्मास्यूटिकल साइंसेस विभाग हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल की ओर से 23 सितंबर 2026 को चौरा परिसर में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया गया। अपने स्वागत भाषण में विभागाध्यक्ष प्रो.अब्दुल फारूक ने आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल में आयुर्वेद की प्रासंगिकता स्वस्थ जीवनशैली रोग-निवारण एवं कल्याण को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने हिमालयी औषधीय पादपों की विविधता पर बल देते हुए उनके वैज्ञानिक प्रमाणीकरण सतत उपयुक्तता तथा साक्ष्य आधारित हर्बल उत्पाद विकास की आवश्यकता जताई। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान के औषधि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ एकीकरण को प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में कुलपति प्रो.प्रकाश सिंह का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया जिसमें रोग-निवारक स्वास्थ्य देखभाल स्वस्थ जीवनशैली एवं सामुदायिक स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका को रेखांकित किया गया। उन्होंने सुरक्षित प्रभावी एवं सुलभ स्वास्थ्य समाधान विकसित करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और समकालीन वैज्ञानिक अनुसंधान के एकीकरण का आह्वान किया तथा कार्यक्रम के आयोजन के लिए विभाग की सराहना की। मुख्य अतिथि प्रो.ओ.पी.गुसाईं डीएसडब्ल्यू ने आयुर्वेद दिवस समारोह के आयोजन में विभाग की पहल की सराहना की। उन्होंने युवाओं के बीच स्वस्थ जीवनशैली रोग-निवारक स्वास्थ्य देखभाल और भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी शैक्षणिक तथा सामुदायिक पहलों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया। साथ ही विश्वविद्यालय में उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया। मुख्य वक्ता वैद्य डॉ.सुशांत मिश्र पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक पतंजलि हरिद्वार ने अपने संबोधन में आयुर्वेद के मौलिक सिद्धांतों एवं वर्तमान स्वास्थ्य देखभाल में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने संतुलित जीवनशैली अपनाने उपयुक्त आहार शैली रोग-निवारक उपायों और समग्र दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया ताकि शारीरिक एवं मानसिक कल्याण बनाए रखा जा सके। उन्होंने छात्रों एवं शोधार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें आयुर्वेद तथा इसके अनुप्रयोगों की वैज्ञानिक समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ.अजय सेमल्टी ने किया। उन्होंने आयुर्वेद के महान ज्ञान को जानने एवं जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए जीवनचर्या में इसे आत्मसात करने का आह्वान करते हुए कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यवाही का संचालन किया। इस कार्यक्रम ने छात्रों शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों को आयुर्वेद की समसामयिक प्रासंगिकता और सामुदायिक स्वास्थ्य देखभाल में इसकी संभावित भूमिका के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया। आयुर्वेद दिवस के अवसर पर पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। मुख्य अतिथि प्रो.गुसाईं एवं मुख्य वक्ता डॉ.मिश्र ने विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए पोस्टर्स का अवलोकन किया तथा इस महत्वपूर्ण प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम का समापन डॉ. मनोज गोयल के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने कुलपति मुख्य अतिथि मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष कार्यक्रम समन्वयक संकाय सदस्यों शोधार्थियों छात्रों एवं उन सभी लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में योगदान दिया। समारोह का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ। इस दौरान औषधि विज्ञान विभाग गढ़वाल विश्वविद्यालय की समग्र स्वास्थ्य रोग-निवारक स्वास्थ्य देखभाल वैज्ञानिक अनुसंधान और सामुदायिक कल्याण को आयुर्वेद तथा पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के जिम्मेदार अन्वेषण के माध्यम से बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
