प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह ने सोमवार को केदारनाथ धाम पहुंचकर बाबा केदार के दर्शन किए और देश एवं प्रदेश की सुख समृद्धि शांति तथा खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने बुरांश और देवदार के पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण प्रकृति के संवर्धन और हिमालय की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने का संदेश दिया।कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि हिमालय केवल हमारी प्राकृतिक धरोहर ही नहीं है बल्कि हमारी सांस्कृतिक आध्यात्मिक और सामाजिक पहचान का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसकी जैव विविधता को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग अत्यंत आवश्यक हो गया है। जलवायु परिवर्तन बढ़ते तापमान अनियमित वर्षा और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच पौधरोपण की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके संरक्षण नियमित देखभाल और उचित विकास के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए। जब तक लगाए गए पौधे वृक्ष बनकर पर्यावरण को लाभ नहीं पहुंचाते तब तक पौधरोपण का उद्देश्य पूरी तरह सार्थक नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। कुलपति ने कहा कि केदारनाथ धाम जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। यहां की वन संपदा जल स्रोत पर्वतीय वनस्पतियां और जैव विविधता हिमालयी पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे क्षेत्रों में प्रकृति के अनुकूल विकास वनों का संरक्षण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बुरांश और देवदार जैसे वृक्षों का पौधरोपण पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश अपनी आकर्षक लालिमा और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। वसंत ऋतु में खिलने वाले इसके फूल पर्वतीय क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं। बुरांश स्थानीय जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके फूलों का पारंपरिक रूप से पेय पदार्थों तथा विभिन्न स्थानीय उत्पादों में उपयोग किया जाता है। इसके वृक्ष पक्षियों और अन्य जीवों के लिए भी अनुकूल प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं। देवदार हिमालयी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण शंकुधारी वृक्ष है। यह अपनी लंबी आयु सदाबहार प्रकृति और मजबूत लकड़ी के लिए जाना जाता है। देवदार के वन पर्वतीय पारिस्थितिकी मृदा संरक्षण और प्राकृतिक आवासों को बनाए रखने में योगदान देते हैं। वनस्पति आवरण वर्षा के पानी को भूमि में समाहित करने और मिट्टी के कटाव को कम करने में सहायक हो सकता है। हालांकि इसका प्रभाव स्थानीय मिट्टी ढलान जलवायु और वन प्रबंधन की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। कुलपति ने कहा कि बुरांश और देवदार जैसे स्थानीय एवं हिमालयी परिस्थितियों के अनुकूल वृक्षों का संरक्षण पर्वतीय पर्यावरण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पौधरोपण के दौरान स्थानीय जलवायु ऊंचाई और मिट्टी के अनुरूप प्रजातियों का चयन करना भी जरूरी है। प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करके ही आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और समृद्ध प्राकृतिक विरासत सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं की सामूहिक भागीदारी से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को व्यापक जनांदोलन का रूप दिया जा सकता है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और हिमालय की अमूल्य प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर केदारनाथ के पुजारी अरविंद पोस्ती हैप्रेक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.सुदीप सेमवाल और मुकेश करासी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
